इराक़ से अमेरिकी गठबंधन की वापसी के बीच, ISIS की संदिग्ध गतिविधियां
इराक़ में अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के मिशन की समाप्ति की तारीख यानी 30 सितंबर नजदीक आने के साथ ही आतंकवादी-सलाफी संगठन ISIS की सेल्स ने एक बार फिर सक्रिय होना शुरू कर दिया है और इराक़ में छिटपुट हमले किए हैं। इससे इस तरह की अटकलें बढ़ गई हैं कि, अमेरिका इराक़ से अपनी वापसी के फैसले को टालने के लिए एक बार फिर ISIS के कार्ड का इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकता है।
इस संबंध में लेबनान के समाचार पत्र अल-अखबार ने इराक़ में गठबंधन के मिशन की समाप्ति की पूर्व संध्या पर ISIS की संदिग्ध गतिविधियों के पीछे के कारणों का विश्लेषण किया है। अखबार ने बताया कि जब भी इराक़ से अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बलों की वापसी की समय-सीमा नज़दीक आती है, ISIS की सेल्स लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद फिर से अपनी गतिविधियां शुरू कर देती हैं। यह स्थिति दोनों घटनाओं के बीच संभावित कारणात्मक संबंध की ओर संकेत करती है।
30 सितंबर यानी इराक़ में अमेरिकी गठबंधन के मिशन की अपेक्षित समाप्ति की तारीख नजदीक आने के साथ ही ISIS की सेल्स फिर से छिटपुट हमले करने लगी हैं। इसका सबसे हालिया मामला बिजी और हदीथा शहरों को जोड़ने वाली सड़क पर बिजली के ट्रांसमिशन टावरों को निशाना बनाने की कोशिश थी। इसके बाद इस क्षेत्र में इराक़ी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ हुई और तलाशी एवं सफाई अभियान चलाया गया।
इराक़ में ISIS की गतिविधियों का नया पैटर्न: छोटी और बिखरी हुई सेल्स
ये गतिविधियाँ ऐसे समय में हो रही हैं जब इराक़ी सुरक्षा सूत्रों ने रेगिस्तानी और सीमावर्ती इलाकों, विशेष रूप से इराक-सिरीया सीमा के आसपास ISIS की सेल्स की गतिविधियों में वृद्धि की सूचना दी है। हालांकि, अब तक इन हमलों से यह संकेत नहीं मिलता कि, ISIS अपने पुराने पैटर्न के तहत शहरों पर क़ब्ज़ा करने की स्थिति में लौट रहा है। इसके बजाय, ये गतिविधियाँ छोटी-छोटी सेल्स के माध्यम से दोबारा सक्रिय होने की उसकी कोशिश को दर्शाती हैं। ये सेल्स हमले करने के लिए रेगिस्तानी और दुर्गम इलाकों का इस्तेमाल करती हैं और विशिष्ट लक्ष्यों को निशाना बनाती हैं।
इस गतिविधियों का समय महत्वपूर्ण है और इसके राजनीतिक तथा सुरक्षा संबंधी आयाम भी हैं, खासकर इसलिए कि, ISIS की ये गतिविधियाँ ऐसे समय में हो रही हैं जब इराक़ एक नए चरण में प्रवेश करने वाला है—ऐसा चरण जिसमें कम-से-कम सैद्धांतिक और औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का मिशन समाप्त हो जाएगा।
इराक़-सिरीया सीमा पर ISIS की गतिविधियाँ
इराक़ी सुरक्षा सूत्रों ने अल-अखबार से बातचीत में बताया कि संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के पास उपलब्ध ख़ुफ़िया जानकारी के अनुसार इराक़-सीरिया सीमा के आसपास ISIS से जुड़ी सेल्स की गतिविधियाँ जारी हैं। इनमें सीमा पार घुसपैठ और लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लगातार प्रयास भी शामिल हैं। इस स्थिति के कारण इराक़ी सुरक्षा बलों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और गश्त बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इन सूत्रों ने कहा कि ISIS सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद ख़ामियों का फायदा उठाकर कम लागत में अधिक प्रभाव पैदा करने वाले हमले करना चाहता है। विशेष रूप से बिजली के टावरों, सुरक्षा चौकियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना उसकी रणनीति का हिस्सा है। इस तरह ISIS के तत्वों को बड़े सैन्य बल की आवश्यकता के बिना सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था में व्यवधान पैदा करने का अवसर मिलता है।
अमेरिकी गठबंधन के मिशन की समाप्ति के साथ ISIS की संदिग्ध गतिविधियों के पीछे क्या है?
ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब इराक़ी सरकार ने पहले से तय समय-सारिणी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के सैन्य मिशन को समाप्त करने का अपना इरादा स्पष्ट किया है। इसके बाद संबंधों को द्विपक्षीय सहयोग के ढांचे में बदल दिया जाएगा।
इराक़ी सरकार ने इस प्रक्रिया को हथियारबंद प्रतिरोध समूहों के हथियारों को सीमित करने की परियोजना से भी जोड़ा है। यह प्रक्रिया अमेरिका के महत्वपूर्ण दबाव और इस मुद्दे को पूरा न करने की स्थिति में इराक़ पर प्रतिबंध लगाए जाने की धमकी के बीच तैयार की गई है। इराक़ी सूत्रों का मानना है कि, अली अल-ज़ैदी के नेतृत्व वाली इराक़ी सरकार इस मामले में अपने वादों को पूरा करने में सक्षम नहीं होगी। इसकी एक वजह प्रतिरोध समूहों का अपने हथियार सौंपने का विरोध और अमेरिकी सैनिकों की इराक़ से वास्तविक वापसी को लेकर उनका अविश्वास बताया जाता है।
इस बीच, खबर में कहा गया है कि, अमेरिका ने अतीत में इराक़ से अपनी वापसी की समय-सारिणी को टालने के लिए ISIS को सक्रिय करने और इस संगठन के हमलों की वापसी को लेकर भय एवं चिंता पैदा करने वाले इसी तरह के परिदृश्य का इस्तेमाल किया है। इसके विपरीत, बग़दाद के सामने मुख्य चुनौती यह है कि, अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के मिशन की समाप्ति के बाद भी वह अपनी ख़ुफ़िया, निगरानी और हवाई क्षमताओं के स्तर को बनाए रखे, ताकि इन क्षमताओं में पैदा होने वाली किसी भी कमी का फायदा ISIS की सेल्स न उठा सकें।
इस संबंध में सुरक्षा मामलों के विश्लेषक अली अल-खफाजी ने अल-अखबार से बातचीत में कहा कि, ISIS की सेल्स का दोबारा सामने आना, भले ही अस्थायी रूप से हो, फिर भी इराक़ की सुरक्षा के लिए ख़तरा है, विशेष रूप से इराक़ और पूरे क्षेत्र में मौजूद राजनीतिक तथा सुरक्षा अस्थिरता को देखते हुए।
उन्होंने कहा कि ISIS इन ख़ामियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए इराक़ी सुरक्षा बलों को रेगिस्तानी और दुर्गम इलाकों में तलाशी एवं सफाई अभियानों को तेज करना चाहिए तथा ख़ुफ़िया, निगरानी और हवाई क्षमताओं को मज़बूत करना चाहिए। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ISIS सीरिया की दिशा से, यानी सीमा पार से, इराक़ में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, इराक़ी संसद की सुरक्षा एवं रक्षा समिति के सदस्य सकर अल-हमीदावी ने कहा कि ISIS की मौजूदा गतिविधियाँ अभी ख़तरनाक स्तर तक नहीं पहुंची हैं। सुरक्षा बल और पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF/हशद अल-शाबी) विभिन्न क्षेत्रों में तैनात हैं तथा आतंकवाद से मुक़ाबला करने और सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा और ख़ुफ़िया प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 30 सितंबर को गठबंधन के मिशन की समाप्ति एक तय और अंतिम मुद्दा है और इसका ISIS की गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है। यह इराक़ी सरकार के साथ हुए समझौते के तहत लिया गया फैसला है और इसके लिए पहले से एक समय-सारिणी निर्धारित है। उन्होंने कहा कि इराकी सुरक्षा बल सीमाओं की रक्षा करने और किसी भी आतंकवादी गतिविधि का मुकाबला करने में सक्षम हैं।
इराक़ में अमेरिका द्वारा ISIS के पुराने कार्ड के इस्तेमाल का आरोप
दूसरी ओर, अली अब्दुलरज़ाक, अल-ग़द स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ सेंटर के निदेशक, का मानना है कि किरकुक और अन्य क्षेत्रों में बिजली की लाइनों तथा सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाना, गठबंधन बलों के मिशन की समाप्ति के समय हालात को उलझाने और दोबारा अराजकता भड़काने की कोशिश के अलावा कुछ नहीं है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि, ISIS का लगातार बना रहने वाला ख़तरा अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी जारी रखने के लिए एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन दोनों के बीच सीधे संबंध को साबित करने के लिए ठोस सबूत आवश्यक हैं।

