इटली, परमाणु ऊर्जा में “बड़ी वापसी” की तैयारी में
वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ती बिजली कीमतों के बीच Italy की सरकार एक बार फिर परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। कई दशकों तक परमाणु ऊर्जा से दूरी बनाए रखने के बाद अब रोम का मानना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास के लिए परमाणु ऊर्जा जरूरी हो सकती है।
इटली ने 1986 की Chernobyl disaster परमाणु दुर्घटना और बाद में 2011 की Fukushima Daiichi nuclear disaster के बाद जनमत और सुरक्षा चिंताओं के कारण अपने परमाणु कार्यक्रम को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया था। लेकिन हाल के वर्षों में यूरोप में गैस संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा आयात पर बढ़ती निर्भरता ने इटली को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सीनेट में कहा कि उनकी सरकार “गर्मी के मौसम तक” परमाणु ऊर्जा सशक्तिकरण कानून को पारित कराने की कोशिश कर रही है। इस कानून के तहत ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा जिससे देश में फिर से परमाणु बिजली उत्पादन शुरू किया जा सके। सरकार का कहना है कि आधुनिक और नई पीढ़ी की परमाणु तकनीक पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी है।
मेलोनी सरकार का मानना है कि परमाणु ऊर्जा से इटली विदेशी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा, बिजली उत्पादन की लागत को नियंत्रित कर पाएगा और देश के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। साथ ही सरकार इसे कार्बन उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के एक साधन के रूप में भी पेश कर रही है।
हालांकि इस योजना को लेकर देश में बहस भी तेज हो गई है। पर्यावरण समूहों और विपक्षी दलों का कहना है कि परमाणु ऊर्जा अभी भी जोखिम भरी है और इटली को सौर तथा पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। वहीं समर्थकों का तर्क है कि लगातार बढ़ती ऊर्जा मांग और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में परमाणु ऊर्जा इटली के लिए एक स्थिर और दीर्घकालिक विकल्प बन सकती है।

