मैं सोच रहा हूँ कि फ़ारस की खाड़ी का नाम “ट्रंप खाड़ी” रख दूं: डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में बड़ा और विवादित बयान देते हुए कहा कि वह फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) का नाम बदलकर “ट्रंप खाड़ी” रखने पर विचार कर रहे हैं। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी आक्रामक और प्रतीकात्मक रूप से उकसाने वाला माना जा रहा है।
इसी बातचीत में ट्रंप ने यह भी कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, की नाकाबंदी जल्द शुरू की जा सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि यह क़दम ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया जाएगा। इस जलडमरूमध्य से रोज़ाना बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है, इसलिए इसकी नाकाबंदी से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भारी उथल-पुथल हो सकती है।
ट्रंप ने अपनी नीति को “या सब कुछ, या कुछ भी नहीं” बताते हुए कहा कि अमेरिका ईरान से पूर्ण रूप से अपनी शर्तें मनवाना चाहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, अगर ईरान 95 प्रतिशत मांगें भी मान ले, तब भी उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे साफ है कि वॉशिंगटन की रणनीति अधिकतम दबाव बनाकर ईरान को पूरी तरह झुकाने की है।
उन्होंने ईरान की तुलना वेनेज़ुएला से करते हुए कहा कि यदि ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं, तो उसे भी आर्थिक और राजनीतिक रूप से उसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप का दावा है कि बढ़ते दबाव के चलते ईरान अंततः बातचीत की मेज़ पर लौटेगा और अमेरिकी मांगों को मानने पर मजबूर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है, खासकर मध्य पूर्व में, जहां पहले से ही हालात संवेदनशील हैं। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की संभावित नाकाबंदी न केवल ईरान, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन सकती है।

