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वैश्विक अहंकार ईरान और प्रतिरोध करने वाले देशों को नुक़सान पहुँचाना चाहता है: मुजतबा ख़ामेनेई

वैश्विक अहंकार ईरान और प्रतिरोध करने वाले देशों को नुक़सान पहुँचाना चाहता है: मुजतबा ख़ामेनेई

इस्लामी क्रांति ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुजतबा ख़ामेनेई ने कहा कि, “वैश्विक अहंकार का दुर्भावनापूर्ण नेटवर्क” ईरान सहित स्वतंत्र और प्रतिरोध करने वाले देशों के साथ अन्याय करने और उन्हें पीड़ा पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। इसमें चिकित्सा उपचार और दवाइयों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है। ईरानी सुप्रीम लीडर ने शुक्रवार को राष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में यह बात कही। ईरान में यह दिवस हर साल पैगंबर मुहम्मद (उन पर शांति हो) की नातिन हज़रत ज़ैनब के जन्मदिन पर मनाया जाता है।

आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा कि हज़रत ज़ैनब का जीवन, विशेष रूप से कर्बला की घटना (आशूरा) में उनकी भूमिका, करुणा, धैर्य, साहस और दृढ़ता का प्रतीक था। ये गुण आज भी ईरानी महिलाओं और लड़कियों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की इस्लामी क्रांति के इतिहास में शुरुआत से ही ईरानी महिलाओं और लड़कियों की ऐसी भागीदारी के अनेक उदाहरण मिलते हैं, जो हज़रत ज़ैनब के आदर्शों से प्रेरित रही है। उन्होंने कहा कि देश की अभूतपूर्व लामबंदी के दौरान यह भागीदारी गुणात्मक और संख्यात्मक, दोनों ही दृष्टि से उल्लेखनीय स्तर तक पहुँच गई है। उनका इशारा तीसरे पवित्र रक्षा संघर्ष की ओर था, जिससे उनका आशय फरवरी से ईरान पर अमेरिका और इस्राईल के हमलों से था।

उन्होंने आगे कहा कि हज़रत ज़ैनब से प्रेरणा लेने वाली ईरानी महिलाएँ आज विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। विशेष रूप से, वे शहरों और गाँवों के सार्वजनिक स्थानों पर सक्रिय हैं। वे युद्ध की वास्तविकताओं को समझाने और अग्रिम मोर्चे के पीछे रहकर प्रतिरोध का प्रदर्शन करने में दूसरों के लिए उदाहरण बन रही हैं।

मौजूदा शक्तियाँ ईरानी जनता को पीड़ा, दर्द और दमन का शिकार बनाना चाहती हैं

उन्होंने कहा कि मौजूदा शक्तियाँ ईरानी जनता को पीड़ा, दर्द और दमन का शिकार बनाना चाहती हैं, लेकिन वे महिलाओं की इस व्यापक भागीदारी का सामना करने में स्वयं को सक्षम नहीं पातीं। आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि, हज़रत ज़ैनब के जन्मदिन को नर्स दिवस के रूप में मनाने का निर्णय उचित है, क्योंकि वे पीड़ितों के प्रति करुणा, दर्द में पड़े लोगों के प्रति सहानुभूति और उनकी सेवा में आत्म-बलिदान की भावना के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि मेहनती और सम्मानित नर्सिंग समुदाय में भी ये नैतिक गुण और मानवीय मूल्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि,
नर्सों की भूमिका डॉक्टरों, शिक्षकों, धर्मगुरुओं और राहतकर्मियों की तरह ऐसी है, जो लोगों में आशा जगाती है और उन्हें भरोसा तथा मानसिक संबल प्रदान करती है। उन्होंने कहा, “कभी-कभी नर्स को दया और करुणा की देवी के समान माना जाता है। ऐसा तब होता है, जब वह दर्द और तकलीफ से जूझ रहे लोगों की चिड़चिड़ाहट और अधीरता के बावजूद धैर्य बनाए रखती है और मरीज़ों को मानसिक शांति, आशा, स्वस्थ होने तथा उपचार के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। इसके परिणामस्वरूप ईश्वरीय कृपा का मार्ग भी प्रशस्त होता है।”

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने कहा कि डॉक्टरों के विपरीत, जिनके काम में आम तौर पर मरीज के बिस्तर के पास लगातार मौजूद रहना उतना आवश्यक नहीं होता, नर्सों को मरीज़ों के साथ निरंतर और धैर्यपूर्वक जुड़े रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नर्सों की इस निरंतर मौजूदगी का प्रभाव केवल शारीरिक देखभाल तक सीमित नहीं रहता। इससे मरीज़ों की मानसिक और भावनात्मक पीड़ा कम करने में मदद मिलती है और कई मामलों में उन्हें निराशा में डूबने से भी बचाया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “इस तरह नर्सों की करुणापूर्ण भूमिका के माध्यम से वह काम भी पूरा हो जाता है, जो डॉक्टरों की क्षमता से परे रह जाता है।” वैश्विक अहंकार के दुर्भावनापूर्ण नेटवर्क का उल्लेख करते हुए, जो स्वतंत्र और दृढ़ प्रतिरोध करने वाले देशों, विशेष रूप से ईरान की जनता के साथ विभिन्न प्रकार के अन्याय और अपराध करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने नर्सों को समर्थन देने के महत्व पर ज़ोर दिया।

चिकित्सा उपचार और दवाइयों पर प्रतिबंध ईरानी जनता को पीड़ा पहुँचाने का तरीक़ा

उन्होंने कहा कि चिकित्सा उपचार और दवाइयों पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाना भी ईरानी जनता को पीड़ा पहुँचाने के लिए अपनाए जाने वाले तरीक़ों में से एक है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग समुदाय को मज़बूत करना और नर्सों के ज्ञान, कौशल, क्षमताओं, मनोबल, कार्य के प्रति प्रेरणा तथा सम्मान को बनाए रखना और उनमें सुधार करना समाज के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से उन नर्सों के लिए ज़रूरी है, जिन्होंने सरकारी और गैर-निजी संस्थानों में काम करने के लिए स्वयं को समर्पित किया है।

अंत में, उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र के अधिकारियों से अपील की कि वे इन प्राथमिकताओं को अपने काम का प्रमुख हिस्सा बनाएँ और अपनी जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए नर्सिंग समुदाय के हित में आवश्यक कदम उठाएँ।

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