Site icon ISCPress

यमन की लेबनान मोर्चे को समर्थन देने की तैयारी, इज़रायली आक्रामकता के खिलाफ एकजुट प्रतिक्रिया का संकेत

यमन की लेबनान मोर्चे को समर्थन देने की तैयारी, इज़रायली आक्रामकता के खिलाफ एकजुट प्रतिक्रिया का संकेत

हवाले से दावा किया है कि यदि इज़रायल और लेबनान के बीच संघर्ष में और वृद्धि होती है, तो क्षेत्र के विभिन्न प्रतिरोधी समूह समन्वित प्रतिक्रिया दे सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यमन की राजधानी सना में मौजूद नेतृत्व का मानना है कि लेबनान पर किसी बड़े सैन्य दबाव की स्थिति में उसे अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

अल-अख़बार के अनुसार, अंसारुल्लाह आंदोलन क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर करीबी नज़र बनाए हुए है और दक्षिणी लेबनान तथा उत्तरी इज़राइल के सीमावर्ती क्षेत्रों में जारी सैन्य गतिविधियों का लगातार आकलन कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठन संभावित भविष्य की परिस्थितियों के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को बनाए हुए है।

उधर, हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच तनाव पिछले महीनों में कई बार बढ़ा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में रॉकेट, ड्रोन और तोपखाने से जुड़े हमलों के कारण दोनों पक्षों को नुकसान उठाना पड़ा है। क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि संघर्ष का दायरा और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव केवल लेबनान और इज़रायल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभिन्न पक्ष वर्तमान घटनाक्रम को अपने-अपने दृष्टिकोण से देख रहे हैं। जहाँ प्रतिरोधी समूह अपनी सैन्य क्षमता को प्रभावी बताते हैं, वहीं इज़रायल अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं और सैन्य अभियानों को उचित ठहराता है। इस कारण क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय कई बार और बढ़ जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी व्यापक सैन्य टकराव से मानवीय, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील करता रहा है।

Exit mobile version