Site icon ISCPress

ईरान का बहरीन पर लगातार हमला क्यों?

ईरान का बहरीन पर लगातार हमला क्यों?

बहरीन मध्य-पूर्व के सबसे छोटे देशों में से एक है। इसकी आबादी लगभग 20 लाख के करीब है, जिनमें लगभग आधे स्थानीय लोग और आधे विदेशी निवासी हैं। क्षेत्रफल के हिसाब से यह लगभग 765 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और यह करीब 30 छोटे-छोटे द्वीपों से मिलकर बना है। सऊदी अरब से इसे जोड़ने वाला एकमात्र ज़मीनी रास्ता King Fahd Causeway है, जो बहरीन और सऊदी अरब को आपस में जोड़ता है। शिया और सुन्नी मुसलमानों के संदर्भ में बहरीन का उल्लेख ऐतिहासिक किताबों में Rashidun Caliphate के दौर से मिलता है।

ईरान की विजय के बाद लंबे समय तक बहरीन ईरान के प्रभाव में रहा। औपनिवेशिक दौर में बहरीन यूनाइटेड किंगडम के नियंत्रण में रहा और 1971 में, मोहम्मद रज़ा पहलवी के शासनकाल में बहरीन को ईरान से अलग कर दिया गया। यह घटना Iranian Revolution से लगभग आठ साल पहले हुई थी। इसके बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि इतना छोटा देश मध्य-पूर्व में आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

बहरीन में लोकतंत्र की मांग उठाने वाले लोग यहां की राजशाही व्यवस्था से खुश नहीं हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि, बहरीन के शासक अमेरिका और इज़रायल के बहुत करीबी सहयोगी माने जाते हैं। जब Deal of the Century (मध्य-पूर्व शांति योजना) की घोषणा की गई थी, तब इसकी पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक बहरीन में आयोजित की गई थी।

इसके अलावा बहरीन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा मौजूद है। बहरीन में U.S. Fifth Fleet का मुख्यालय है, जहां लगभग 20,000 अमेरिकी सैनिक हमेशा तैनात रहते हैं। बहरीन से अमेरिका मध्य-पूर्व, एशिया और अफ्रीका के लगभग 22 देशों की गतिविधियों पर नजर रखता है। Persian Gulf से लेकर Indian Ocean, Strait of Hormuz से लेकर Suez Canal तक आने-जाने वाले जहाजों पर निगरानी रखी जाती है।

बहरीन के इसी सैन्य अड्डे के माध्यम से इज़रायल के साथ संपर्क बनाए रखा जाता है और उसकी सुरक्षा में सहयोग किया जाता है। यह मध्य-पूर्व में अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक है और इसी अड्डे के जरिए क्षेत्र में मौजूद अन्य अमेरिकी ठिकानों को भी आपस में जोड़ा जाता है।

7 अक्टूबर 2001 को 9/11 हमलों के बाद, अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया, जिससे तालिबान सरकार खत्म हो गई और लाखों निर्दोष अफ़ग़ान मुस्लिम शहीद हुए। इसके बाद 20 मार्च 2003 को इराक़ पर हमला किया गया, जिससे सद्दाम हुसैन की सरकार खत्म हुई और लाखों इराक़ी मुस्लिम मारे गए। इसी बेस से यमन पर भी बमबारी की गई, जिसमें हजारों यमनियों की हत्या हुई। बहरैन से ही ईरान पर हमले किए गए, खासकर तेहरान में एक बच्चों के स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें लगभग 170 मासूम बच्चियां शहीद हो गईं।

यह वह बेस है जहाँ से अमेरिका ने अपने सभी हमले किए, जिनमें लाखों मुसलमान पुरुष, महिलाएं और बच्चे शहीद हुए। इस समय, ईरानी इस्लामी क्रांति का मुख्य लक्ष्य यही अमेरिकी आधार है। ईरान ने इस आधार पर सैकड़ों बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें दागी हैं, और इसके अलावा ड्रोन हमलों से इसका राडार सिस्टम लगभग निष्क्रिय कर दिया है।

इस बेस के कीमती राडार सिस्टम को सफलतापूर्वक नष्ट करने के बाद, अमेरिका पूरे मध्य पूर्व में लगभग “अंधा” हो गया है, जिसके कारण मित्रवत आग (friendly fire) में कुवैत में उसके तीन विमान गिर चुके हैं। बहरैन में उनके मिसाइल हमलों से कई बहरैनी नागरिक भी शहीद और घायल हुए हैं।

ईरान बहरैन में अमेरिका के इस महत्वपूर्ण सैन्य आधार पर लगातार हमले करके दरअसल लाखों अन्यायग्रस्त अफ़ग़ान, इराक़ी, यमनी, फ़िलिस्तीनी और ईरानी लोगों के निर्दय हत्या का बदला ले रहा है। यह हमला बहरैन पर नहीं, बल्कि अमेरिका की “रीढ़ की हड्डी” पर हो रहा है।

Exit mobile version