Site icon ISCPress

क्यों इस बार इज़रायली लड़ाकू विमान ईरान के हवाई क्षेत्र में नहीं घुसे?

क्यों इस बार इज़रायली लड़ाकू विमान ईरान के हवाई क्षेत्र में नहीं घुसे?

बेरूत के दक्षिणी उपनगर (दहियाह) पर इज़रायली हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल व ड्रोन हमलों के बाद, इज़राइल ने कुछ रडार ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, जानकार सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई में इज़रायली लड़ाकू विमानों ने ईरान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं किया, बल्कि देश की सीमाओं के बाहर से ही लंबी दूरी के हथियार (स्टैंड-ऑफ वेपन्स) दागे।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यह बदली हुई रणनीति इस बात का संकेत है कि ईरान के हवाई क्षेत्र में सीधे प्रवेश करना अब दुश्मन के लड़ाकू विमानों के लिए अधिक जोखिम भरा हो गया है।

इस कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी त्वरित प्रतिक्रिया दी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने Tel Nof Airbase और Nevatim Airbase सैन्य अड्डों को मिसाइल हमलों का निशाना बनाया।

19 फ़रवर्दीन को हुए युद्धविराम के बाद, ईरान के एकीकृत वायु रक्षा नेटवर्क ने रडार प्रणालियों के पुनर्निर्माण, रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने तथा निगरानी, कमांड और फायर कंट्रोल केंद्रों के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से अपनी परिचालन क्षमता को और बढ़ाया है।

रमज़ान के दौरान चले 40 दिनों के युद्ध में भी ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने 200 से अधिक शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों, जिनमें लड़ाकू विमान, क्रूज़ मिसाइलें और ड्रोन शामिल थे, का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने का दावा किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रक्षात्मक क्षमता ही नहीं, बल्कि क्षतिग्रस्त प्रणालियों को शीघ्र पुनः सक्रिय करने की क्षमता भी अब ईरान की प्रतिरोधक शक्ति (डिटरेंस) का एक महत्वपूर्ण तत्व बन चुकी है।

Exit mobile version