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ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रमण में हम तटस्थ नहीं रहेंगे: हिज़्बुल्लाह

ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रमण में हम तटस्थ नहीं रहेंगे: हिज़्बुल्लाह

लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के महासचिव शेख नइम क़ासिम ने अपने भाषण में ज़ोर देकर कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रमण के सामने हम तटस्थ नहीं रहेंगे। शेख नइम क़ासिम, लेबनानी जनता की ओर से इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ एकजुटता और सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई के अपमान की निंदा में आयोजित एकजुटता सभा को संबोधित कर रहे थे। यह सभा सैयदुश्शुहदा परिसर में आयोजित की गई।

उन्होंने कहा:
हम आज यहां इस्लामी गणराज्य ईरान और उसके प्रेरणादायक नेता सैयद अली ख़ामेनेई के साथ एकजुटता और समर्थन की घोषणा के लिए एकत्र हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा:
ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार के आक्रमण के सामने हम तटस्थ नहीं रहेंगे।इस्लामी गणराज्य की स्थापना के बाद से ही अमेरिका ने उसके साथ टकराव शुरू कर दिया था और उसने इराक़ के ज़रिए ईरान के ख़िलाफ़ आठ साल लंबा युद्ध छेड़ा।

शेख नइम क़ासिम ने कहा:
इस्लामी गणराज्य ईरान, हमारे सिर का ताज है। हम इस्लामी क्रांति के नेता से भी कहते हैं कि हम हमेशा आपके साथ हैं। आयतुल्लाह ख़ामेनेई हमारे हमारे नेता हैं, और उनके खिलाफ कोई भी धमकी करोड़ों लोगों के खिलाफ धमकी के समान है। जब ट्रंप आयतुल्लाह ख़ामेनेई को धमकी देता है, तो वह वास्तव में उन करोड़ों लोगों को धमकी देता है जो उनके अनुयायी हैं। हमें पूरी ताकत और तैयारी के साथ इस धमकी का सामना करना चाहिए, क्योंकि आयतुल्लाह ख़ामेनेई पर किसी भी तरह का हमला क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता पर हमला है, क्योंकि उनके समर्थक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं।

उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा:
हम इस धमकी को अपने ख़िलाफ़ मानते हैं और इसका सामना करने के लिए जो भी उचित होगा, उसे करने का हमें पूरा अधिकार है। अमेरिका 1979 (1357 हिजरी शम्सी) से इस्लामी गणराज्य का विरोध कर रहा है, क्योंकि वह एक स्वतंत्र और स्वाधीन देश के अस्तित्व को सहन नहीं कर सकता, जो मुसलमानों और दुनिया के वंचितों के लिए एक संदर्भ हो।

हिज़्बुल्लाह महासचिव ने आगे कहा:
अमेरिका ने इराक के माध्यम से ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा, जो आठ वर्षों तक चला। इस दौरान हर प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल किया गया और ईरान को गिराने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए गए, लेकिन अंततः उसे हार का सामना करना पड़ा। इस्लामी गणराज्य की स्थापना और उसकी क्रांति की सफलता अमेरिका और इज़रायल के लिए सबसे बड़ा झटका थी। बारह दिनों के युद्ध में भी ईरान ने डटकर सामना किया और आयतुल्लाह ख़ामेनेई के नेतृत्व में अमेरिका और इज़रायल की योजनाओं को विफल कर दिया।

उन्होंने कहा:
दुश्मनों ने आर्थिक दबाव के ज़रिए ईरान को भीतर से तोड़ने की कोशिश की और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच उपद्रवियों को भेजा, जिन्होंने सुरक्षा बलों और जनता को निशाना बनाया तथा मस्जिदों, वाहनों और केंद्रों को आग लगा दी।

शेख नइम क़ासिम ने कहा:
पिछले दो महीनों में कई पक्षों ने हमसे यह स्पष्ट सवाल पूछा कि यदि अमेरिका और इज़रायल ईरान पर हमला करते हैं तो क्या हम हस्तक्षेप करेंगे। हमारा जवाब यह था कि संभावित आक्रमण की स्थिति में हम स्वयं निशाना बनेंगे और रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उस समय हम यह तय करेंगे कि कैसे व्यवहार करना है, हस्तक्षेप करना है या नहीं, लेकिन हम तटस्थ नहीं रहेंगे। किसने कहा कि रक्षा केवल शक्ति की समानता पर निर्भर करती है? रक्षा का अर्थ है दुश्मन को अपने लक्ष्यों को हासिल न करने देना।

उन्होंने आगे कहा:
कुछ लोग योजना बना रहे थे कि लेबनान को “इज़रायल” का हिस्सा बना दिया जाए और उसकी ज़मीनें उसे बेच दी जाएं। हम सत्य, सम्मान, मातृभूमि, भूमि की मुक्ति, शहीदों के प्रति निष्ठा और उन सम्मानित परिवारों के समर्थक हैं जिन्होंने बलिदान दिए हैं और आज भी दे रहे हैं।

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