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हमने युद्धविराम की कोई मांग नहीं की, प्रतिरोध जारी रहेगा: अराक़ची 

हमने युद्धविराम की कोई मांग नहीं की, प्रतिरोध जारी रहेगा: अराक़ची 

ईरान के विदेश मंत्री ने आज विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक प्रेस सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमने कठिन लेकिन गर्व से भरे दिन देखे हैं। पिछला एक वर्ष इस्लामी गणराज्य ईरान के इतिहास में अभूतपूर्व रहा है। हमने एक युद्ध को पीछे छोड़ दिया है और एक युद्ध अभी भी जारी है। इस दौरान हमने अनेक शहीदों का बलिदान दिया है।

उन्होंने कहा कि हम अपने लोगों, अपने बच्चों, अपने जिम्मेदार अधिकारियों और अपने कमांडरों के आभारी हैं, और सबसे बढ़कर सर्वोच्च नेता शहीद आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई का धन्यवाद करते हैं, जो इस महान पद तक पहुंचने के योग्य थे। उनके जीवनभर के संघर्ष और सेवा के इतिहास में यह सम्मान का पदक जुड़ना भी आवश्यक था।

उन्होंने कहा कि यह वर्ष कठिन जरूर रहा, लेकिन साथ ही यह गर्व, सम्मान और आत्मसम्मान से भरा रहा। वर्ष की शुरुआत में जो युद्ध हुआ, उसे हमारे विरोधियों ने बिना किसी शर्त के आत्म-समर्पण की मांग के साथ शुरू किया था, लेकिन अंत में मात्र 12 दिनों के भीतर वही पक्ष बिना किसी शर्त के युद्ध-विराम की अपील करने लगा।

उन्होंने आगे कहा कि इस बार भी उसी परिदृश्य को पहले से अधिक तीव्रता और शक्ति के साथ लागू करने की कोशिश की गई। उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी ताकि बिना शर्त आत्म-समर्पण कराया जा सके।

भारी हमलों के साथ युद्ध की शुरुआत की गई और पहले ही दिन बिना शर्त आत्म-समर्पण की बात दोहराई गई। लेकिन अब लगभग 15 दिनों के बाद वही लोग हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए उन देशों से मदद मांग रहे हैं जिन्हें कल तक अपना दुश्मन बताते थे, और अन्य देशों से भी आग्रह कर रहे हैं कि वे उनकी सहायता करें ताकि यह जलडमरूमध्य खुला रह सके।

उन्होंने कहा कि हम एक गौरवपूर्ण प्रतिरोध के दौर से गुजर रहे हैं और बिना किसी हिचकिचाहट के इस प्रतिरोध को जारी रखेंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि कल रात अमेरिकी समाचार नेटवर्क सीबीएस को दिए गए साक्षात्कार में भी उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि, ईरान ने किसी को कोई संदेश नहीं भेजा है और न ही युद्ध-विराम की मांग की है। हालांकि, यह युद्ध इस प्रकार समाप्त होना चाहिए कि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो।

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