हम एक बड़े और ऐतिहासिक युद्ध में दुश्मन को पीछे धकेल रहे हैं: क़ालिबाफ़
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने देश की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान इस समय एक बड़े और इतिहास-निर्माता संघर्ष के दौर से गुजर रहा है तथा दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में सफलता का सबसे महत्वपूर्ण आधार राष्ट्रीय एकता और जनता की दृढ़ता है। उनके अनुसार, दुश्मन की कथित पीछे हटने की स्थिति केवल सैन्य शक्ति और रक्षात्मक तैयारियों का परिणाम नहीं है, बल्कि जनता की एकजुटता और प्रतिरोध की भावना भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
क़ालीबाफ़ ने कहा कि जैसा कि देश के सर्वोच्च नेता ने भी बल दिया है, राष्ट्रीय एकता को हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि दुश्मन अब युद्ध के नए चरण में आर्थिक दबाव और मीडिया प्रचार का सहारा लेकर देश के भीतर मतभेद पैदा करने तथा राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना था कि विरोधी शक्तियाँ अपनी कथित सैन्य विफलताओं की भरपाई के लिए ईरानी समाज में विभाजन उत्पन्न करना चाहती हैं, लेकिन वे अपने इस उद्देश्य में सफल नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि ईरानी जनता आज इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है और उसे इस बात का एहसास है कि वर्तमान परिस्थितियाँ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी यादगार होंगी। उनके अनुसार, लोग ईरान और इस्लाम की रक्षा के लिए दृढ़ता के साथ खड़े हैं ताकि आने वाली पीढ़ियाँ अपने पूर्वजों पर गर्व कर सकें।
अपने संबोधन के दूसरे हिस्से में क़ालीबाफ़ ने शहीद इमाम की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि हर वर्ष इस समय उनके साथ होने वाली मुलाकातें प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत होती थीं। उन्होंने कहा कि यद्यपि शहीद इमाम को खोना अत्यंत दुखद है, फिर भी वे उनके उत्तराधिकारी आयतुल्लाह सैय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई के नेतृत्व और मार्गदर्शन से आश्वस्त हैं। उनके अनुसार, उनके संदेश और निर्देश देश के लिए मार्गदर्शक होने के साथ-साथ लोगों के लिए सांत्वना का भी स्रोत हैं।
संसद अध्यक्ष ने सांसदों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं से निरर्थक राजनीतिक विवादों से बचने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता की रक्षा करना एक धार्मिक और नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक मतभेदों को अनावश्यक रूप से बढ़ावा देना देश के हित में नहीं है। क़ालीबाफ़ ने जोर देकर कहा कि संसद को अपने निर्णयों, विधायी कार्यों और सार्वजनिक वक्तव्यों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, आशा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में देश की एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति है और इसे हर कीमत पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

