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अमेरिका का नई इराकी सरकार पर दबाव, अपने समर्थक मंत्रियों की नियुक्ति की कोशिश

अमेरिका का नई इराकी सरकार पर दबाव, अपने समर्थक मंत्रियों की नियुक्ति की कोशिश

इराक़ में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज़ होती जा रही है। इसी बीच राजनीतिक गठबंधन “अज़्म” के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अल-फहदावी ने आरोप लगाया है कि अमेरिका, नामित प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी की सरकार के गठन में सीधे तौर पर हस्तक्षेप कर रहा है और अपने करीबी तथा समर्थक चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करवाने के लिए दबाव बना रहा है।

अल-फहदावी ने इराकी समाचार वेबसाइट “अल-मालूमा” से बातचीत में कहा कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया केवल आंतरिक राजनीतिक समझौतों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बाहरी शक्तियां, विशेष रूप से अमेरिका, मंत्रियों के चयन में प्रभाव डालने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, अली अल-ज़ैदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे अमेरिकी दबाव और इराकी राजनीतिक दलों की मांगों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें।

उन्होंने दावा किया कि वॉशिंगटन ने अली अल-ज़ैदी को समर्थन कुछ खास शर्तों के साथ दिया है। इन शर्तों में ऐसे मंत्रियों की नियुक्ति शामिल बताई जा रही है जो अमेरिकी नीतियों के प्रति नरम रुख रखते हों और सुरक्षा, ऊर्जा तथा विदेश नीति जैसे अहम मंत्रालयों में अमेरिका समर्थक व्यक्तियों को जगह दी जाए। अल-फहदावी के मुताबिक, अमेरिका इन शर्तों को लागू कराने के लिए लगातार राजनीतिक दबाव बना रहा है।

इराक में लंबे समय से अमेरिका के प्रभाव और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर विवाद होता रहा है। कई इराकी राजनीतिक दल, खासकर शिया गुट और प्रतिरोध समर्थक संगठन, बार-बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि वॉशिंगटन इराक की राजनीति को अपने हितों के अनुसार प्रभावित करने की कोशिश करता है। दूसरी ओर, अमेरिका का कहना रहा है कि वह इराक में स्थिरता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए सहयोग करता है।

नई सरकार के गठन के इस दौर में अमेरिका की कथित भूमिका को लेकर बहस और तेज़ हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बाहरी हस्तक्षेप के आरोप बढ़ते हैं, तो इससे इराक के भीतर राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है तथा विभिन्न गुटों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

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