अमेरिकी सैन्य ठिकाने किसी की भी रक्षा नहीं करते: क़ालिबाफ़
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ ने कहा कि हालिया युद्ध ने साफ कर दिया है कि मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि अस्थिरता के लिए ज़िम्मेदार हैं। उनके अनुसार जिन देशों में ये ठिकाने बने हुए हैं, वहाँ शांति और स्थिरता संभव नहीं है।
क़ालिबाफ़ ने कहा कि अमेरिका अपने हितों और विशेष रूप से इज़रायल की रक्षा के लिए पूरे क्षेत्र को युद्ध के खतरे में डाल देता है। उनका आरोप है कि अमेरिका की नीतियाँ मध्य-पूर्व के देशों की संप्रभुता को कमजोर करती हैं और उन्हें संघर्ष में धकेलती हैं।
उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने यह भी साबित कर दिया कि जिन देशों को अमेरिका सुरक्षा का भरोसा देता है, वे वास्तव में सुरक्षित नहीं होते। बल्कि अमेरिकी सैन्य अड्डे उन देशों को संभावित हमलों और तनाव का केंद्र बना देते हैं।
ईरानी नेतृत्व का मानना है कि ईरान अपनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा के लिए खड़ा है। क़ालिबाफ़ के अनुसार यदि किसी देश पर दबाव डालकर उसे अमेरिकी नीतियों के अधीन कर दिया जाता है, तो वह वास्तव में कमजोर और निर्भर हो जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहता, लेकिन यदि उस पर हमला किया गया तो वह अपने देश और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कठोर जवाब देगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि आक्रमण करने वाले पक्ष को सबक सिखाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करने की हिम्मत न करे।
क़ालिबाफ़ के बयान के अनुसार, मध्य-पूर्व में शांति तब तक संभव नहीं है जब तक विदेशी सैन्य हस्तक्षेप समाप्त नहीं होता और क्षेत्रीय देशों को अपने निर्णय स्वयं लेने की स्वतंत्रता नहीं मिलती।

