अमेरिका ने सऊदी अरब और क़तर में पैट्रियट की दो नई बैटरियां तैनात कीं
अमेरिकी सेना ने पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान सऊदी अरब और क़तर में महत्वपूर्ण तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली की दो अतिरिक्त बैटरियां तैनात की हैं। एक्सियोस ने दो अमेरिकी अधिकारियों और क्षेत्र के एक सूत्र के हवाले से दावा किया है कि, इनमें से एक बैटरी सऊदी अरब में एक महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए और दूसरी क़तर में एक गैस प्रतिष्ठान की सुरक्षा के लिए तैनात की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने पिछले महीने भी एक पैट्रियट बैटरी सऊदी अरब और एक अन्य बैटरी क़तर भेजी थी। इन तैनातियों का उद्देश्य सऊदी अरब के एक महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान और क़तर के एक प्राकृतिक गैस प्रतिष्ठान की सुरक्षा करना बताया गया है।
इन रक्षा प्रणालियों की तैनाती का महत्व केवल क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यदि ईरान के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान दोबारा शुरू होता है, तो अमेरिका को अपने हवाई अभियानों के लिए सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि, रियाद को अपने तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर चिंता होने की स्थिति में अमेरिकी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के मामले में अधिक सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के सामने थाड और पैट्रियट की कमज़ोरियां
खाड़ी क्षेत्र में हवाई रक्षा को मज़बूत करने की यह कोशिश ऐसे समय में की जा रही है, जब ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से पैट्रियट प्रणालियां और विशेष रूप से उनकी इंटरसेप्टर मिसाइलें अमेरिकी सेना के लिए सबसे अधिक मांग वाले सैन्य उपकरणों में शामिल हो गई हैं।
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी कुछ क्षेत्रीय कमांडों से पैट्रियट बैटरियां और इंटरसेप्टर मिसाइलें मध्य पूर्व में स्थानांतरित की हैं। इससे दुनिया के अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी रक्षा तैयारियों के स्तर को लेकर भी चिंताएं पैदा हुई हैं।
इसके अलावा, 40 दिनों तक चले युद्ध के दौरान ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को भेदकर आगे निकल जाने की घटनाओं ने क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों के बीच भी काफी चिंता पैदा की है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने हाल ही में रिपोर्ट दी थी कि अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के भंडार में तेजी से हो रही कमी और ईरान की बदलती सैन्य रणनीति के कारण अमेरिका की हवाई रक्षा क्षमता पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

