ड्रोन हमलों और हॉर्मुज़ के बंद होने से यूएई का फुजैरा हाशिये पर चला गया
यूएई का फुजैरा बंदरगाह, जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर स्थित होने के कारण जहाज़ों के लिए एक रणनीतिक “हब” और वैकल्पिक ईंधन भरने का केंद्र माना जाता था, अब क्षेत्र में अपनी स्थिति लगभग खो चुका है।
इस आर्थिक गिरावट के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
1_ ड्रोन हमले और बुनियादी ढांचे को नुकसान:
23 मार्च को फुजैरा के औद्योगिक क्षेत्र पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे तेल भंडारण सुविधाओं में भीषण आग लग गई। इस घटना के कारण लोडिंग ऑपरेशन रुक गए और ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई।
2_ तेल ट्रांजिट में कमी और मांग का गिरना:
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों की आवाजाही काफी सीमित हो गई है। इससे ईंधन भरने की मांग में भारी गिरावट आई है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में फुजैरा बंदरगाह पर समुद्री ईंधन की बिक्री 2021 के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई और पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 70% से अधिक गिर गई। यह सिर्फ एक बंदरगाह की गिरावट नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की ऊर्जा और व्यापारिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
संकेत मिलते हैं कि ईंधन भरने की मांग अब दुनिया के अन्य बंदरगाहों, खासकर सिंगापुर, की ओर स्थानांतरित हो रही है। यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर यूएई की व्यापारिक स्थिति के लिए दीर्घकालिक झटका साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, यदि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता और व्यापारिक मार्ग स्थायी रूप से बदलने लगते हैं, तो फुजैरा बंदरगाह की भूमिका लंबे समय तक कमजोर रह सकती है। यह केवल एक स्थानीय आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक संतुलन में संभावित बदलाव का संकेत भी है।

