यूएई की अर्थव्यवस्था संकट के कगार पर; अमेरिका से मदद की मांग
अंग्रेजी अख़बार The Wall Street Journal ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि United Arab Emirates ने आर्थिक संकट के और गहराने की स्थिति में वित्तीय सहायता पाने के लिए वॉशिंगटन से बातचीत की है। अमीराती अधिकारियों ने माना है कि हालिया संघर्ष के कारण पैदा हुए गंभीर आर्थिक प्रभावों का उन्होंने सामना किया है, लेकिन अभी भी उन्हें अमेरिका से तत्काल वित्तीय मदद की जरूरत पड़ सकती है।
यूएई ने वॉशिंगटन को यह भी सूचित किया है कि अगर उसे पर्याप्त डॉलर उपलब्ध नहीं कराए गए, तो वह अपना तेल चीनी मुद्रा (Chinese Yuan) में बेचने पर मजबूर हो सकता है। इसके अलावा, यूएई ने अमेरिकी पक्ष से जोर देकर कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर हमले का फैसला ही वह कारण है जिसने इस देश को एक विनाशकारी संघर्ष में धकेल दिया, जिसके प्रभाव लंबे समय तक जारी रह सकते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यूएई, जो अब तक अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापारिक केंद्र के रूप में पहचान रखता था, अब कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में धीमापन, विदेशी निवेश में कमी, और वैश्विक बाजारों की अस्थिरता ने आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है। इसके अलावा, क्षेत्रीय राजनीतिक तनाव और सुरक्षा पर बढ़ता खर्च भी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
अमेरिकी सैन्य अड्डे अब “सुरक्षा की गारंटी” के बजाय “एक बोझ” हैं
इसी बीच, यूएई के एक प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक और राष्ट्रपति के पूर्व सलाहकार Abdulkhaleq Abdullah का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा कि देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे अब “सुरक्षा की गारंटी” के बजाय “एक बोझ” बनते जा रहे हैं। उनका मानना है कि इन अड्डों की वजह से यूएई क्षेत्रीय संघर्षों में अनचाहे रूप से घिर सकता है, जिससे आर्थिक और राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बदलते वैश्विक हालात में यूएई को अपनी विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, अगर देश को अपनी आर्थिक स्थिरता और स्वतंत्र नीति बनाए रखनी है, तो उसे बाहरी निर्भरता कम करनी होगी—चाहे वह सैन्य हो या आर्थिक।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यूएई को न केवल अमेरिका बल्कि अन्य वैश्विक साझेदारों के साथ भी नए आर्थिक समझौते करने पड़ सकते हैं। वहीं, कुछ विश्लेषक यह भी कहते हैं कि यह बयान आंतरिक दबाव और रणनीतिक बदलाव का संकेत हो सकता है, न कि तुरंत किसी बड़े फैसले का।
कुल मिलाकर, यह खबर दिखाती है कि यूएई जैसे मजबूत माने जाने वाले देश भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक बदलावों से अछूते नहीं हैं, और आने वाले समय में उनकी नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

