ईरान के खिलाफ युद्ध समर्थक रुख से पीछे हटा यूएई: ब्लूमबर्ग
अमेरिकी मीडिया संस्था Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की स्थिति को रोकने के लिए अपनी कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज कर दी हैं। यूएई ने सऊदी अरब और क़तर के साथ मिलकर डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और राजनीतिक समाधान को प्राथमिकता दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि अबू धाबी का यह बदला हुआ रुख केवल शांति की इच्छा नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों को बचाने की मजबूरी भी है। वही यूएई, जो पहले अमेरिका और इज़रायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सख्त और आक्रामक नीति का समर्थन करता रहा, आज खुद किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध से भयभीत दिखाई दे रहा है।
यमन, खाड़ी क्षेत्र और समुद्री तनावों के दौरान यूएई को कई बार आर्थिक और सुरक्षा नुकसान झेलना पड़ा। तेल प्रतिष्ठानों, व्यापारिक मार्गों और निवेश के वातावरण पर पड़ने वाले खतरे ने अबू धाबी को यह एहसास करा दिया कि युद्ध की आग केवल विरोधियों को नहीं, बल्कि उसके अपने घर को भी जला सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूएई ने वर्षों तक क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली नीतियों का समर्थन किया, लेकिन अब जब युद्ध के वास्तविक परिणाम सामने आने लगे हैं, तो वह पीछे हटता दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि आज यूएई खुलकर अमेरिका पर दबाव डाल रहा है कि ईरान के साथ टकराव को बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाए।
हालाँकि यूएई, सऊदी अरब और क़तर के बीच ईरान के साथ संभावित समझौते के स्वरूप को लेकर मतभेद मौजूद हैं, लेकिन तीनों देशों को इस बात का डर है कि यदि क्षेत्र में व्यापक युद्ध छिड़ा तो उसकी राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा कीमत पूरी खाड़ी को चुकानी पड़ेगी।

