ट्रंप को अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ युद्ध को लेकर हिचकिचाहट: न्यूयॉर्क टाइम्स
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को लेकर कई बार अपना रुख बदला। रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब ने अंसारुल्लाह की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए अमेरिका से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर मतभेद और सैन्य कार्रवाई की उपयोगिता को लेकर संदेह मौजूद था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप पहले अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ हमले के पक्ष में नहीं थे। इसके बाद सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत हुई, जिसके बाद ट्रंप ने पेंटागन को संभावित हवाई हमलों की तैयारी करने का निर्देश दिया। सैन्य कमांडरों ने कथित तौर पर लक्ष्यों की सूची तैयार कर ली और अमेरिकी लड़ाकू विमानों को हमले के लिए तैयार किया गया। लेकिन अभियान शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप ने फिर अपना फैसला बदल दिया और अमेरिका ने फिलहाल हमले नहीं किए।
इस निर्णय के पीछे एक महत्वपूर्ण कारक सऊदी अरब के साथ अमेरिका के संबंध बताए गए हैं। अमेरिका को ईरान के ख़िलाफ़ चल रहे संघर्ष में सऊदी सहयोग की आवश्यकता है और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि रियाद इस संघर्ष में वॉशिंगटन की सहायता कर सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप के कई क़रीबी सलाहकार और अधिकारी यमन में एक और सैन्य मोर्चा खोलने को लेकर चिंतित बताए गए हैं, क्योंकि अमेरिकी सेना पहले ही ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण दबाव में है।
रिपोर्ट में अंसारुल्लाह की सैन्य क्षमता को भी प्रमुख चिंता के रूप में पेश किया गया है। 2025 में अमेरिका ने 50 दिनों से अधिक समय तक यमन में अंसारुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, उस दौरान 1,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, जिनमें रडार, वायु रक्षा प्रणालियां, मिसाइल ठिकाने और ड्रोन से जुड़े केंद्र शामिल थे। इस अभियान पर भारी मात्रा में अमेरिकी हथियार और गोला-बारूद खर्च हुआ।
इसके बावजूद अंसारुल्लाह ने अपने हमले जारी रखे और अमेरिकी सैन्य संसाधनों को भी नुक़सान पहुंचाया। बाद में ट्रंप ने अचानक युद्ध-विराम की घोषणा की, जिसके बाद अंसारुल्लाह ने अमेरिकी जहाजों के ख़िलाफ़ हमले रोक दिए।
अब अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि दोबारा हवाई हमले शुरू होने पर अंसारुल्लाह भी अमेरिकी ठिकानों और जहाजों के ख़िलाफ़ हमले फिर शुरू कर सकता है। विशेष चिंता बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को लेकर है, जो लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में पहले से मौजूद अस्थिरता के साथ बाब अल-मंदब में व्यवधान वैश्विक तेल, गैस और समुद्री व्यापार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध-विराम के बाद अंसारुल्लाह ने अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से विकसित किया है और नई मिसाइल प्रणालियों के विकास में AI जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का आकलन है कि सऊदी अरब की सहायता के बावजूद अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान आसान या सीमित अवधि में निर्णायक साबित होना निश्चित नहीं है।

