ट्रंप ने ईरान के यूरेनियम को क़ब्ज़े में लेने वाली रिपोर्टों का खंडन किया
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन रिपोर्टों को नकार दिया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के समृद्ध यूरेनियम को कब्जे में लेने के लिए जमीन पर सैनिक भेज सकता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई अभियान शुरू नहीं किया जा रहा, लेकिन भविष्य में इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह बयान कई लोगों के अनुसार अमेरिका की उस नीति को दिखाता है जिसमें वह दूसरे देशों के संसाधनों और तकनीक पर नियंत्रण पाने की कोशिश करता है। ईरान का कहना था कि, उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों—जैसे ऊर्जा उत्पादन और वैज्ञानिक विकास—के लिए है, और किसी भी देश को उसके वैज्ञानिक कार्यक्रम में दखल देने का अधिकार नहीं है।
ईरान के समर्थकों का तर्क है कि अगर कोई देश अपनी वैज्ञानिक क्षमता से यूरेनियम संवर्धन (enrichment) करता है, तो उसे छीनने की बात करना अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ माना जा सकता है। इसीलिए कई विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका की ऐसी धमकियाँ क्षेत्र में तनाव बढ़ाती हैं और शांति की संभावनाओं को कम करती हैं।
अमेरिकी कमांडर द्वारा ईरान की सैन्य क्षमता को स्वीकार करना
ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अख़बार Financial Times के अनुसार कई सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अभी भी ऐसे उन्नत मिसाइल और ड्रोन हैं जिन्हें वर्तमान संघर्ष में अभी तक इस्तेमाल ही नहीं किया गया है।
अमेरिकी विशेष अभियानों के पूर्व कमांडर ने भी माना कि सीमित संसाधनों के बावजूद ईरान ने सैन्य तकनीक और रणनीति में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के पास अमेरिकी सेना की गतिविधियों और जीवन-शैली से जुड़ी संवेदनशील जानकारी भी है।
ईरान के समर्थकों के अनुसार यह इस बात का प्रमाण है कि देश ने लंबे समय तक लगे आर्थिक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपनी रक्षा तकनीक को मजबूत किया है। उनका कहना है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने वर्षों से प्रतिबंध और दबाव की नीति अपनाई, लेकिन इसके बावजूद ईरान ने आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली विकसित कर ली।
कई विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि ईरान क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरा है और पश्चिमी देशों के लिए उसे नजरअंदाज करना आसान नहीं रहा।

