ट्रंम ने कूटनीति और अमेरिकी जनता के साथ विश्वासघात किया: अराक़ची
ईरान के वरिष्ठ विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने एक कड़े बयान में कहा कि जटिल परमाणु वार्ताओं को साधारण व्यापारिक सौदे की तरह देखने की प्रवृत्ति ने कूटनीतिक प्रयासों को गहरी क्षति पहुँचाई है। उनका संकेत उन नीतियों की ओर था जिनमें अंतरराष्ट्रीय समझौतों को दीर्घकालिक विश्वास और पारस्परिक सम्मान के बजाय तात्कालिक लाभ के चश्मे से देखा गया।
अराग़ची ने कहा कि जब बहुपक्षीय वार्ताओं को संपत्ति के लेन-देन जैसी मानसिकता से संचालित किया जाता है, तब वास्तविकताओं की उपेक्षा होती है और अवास्तविक अपेक्षाएँ पैदा होती हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार का दृष्टिकोण अंततः संवाद की प्रक्रिया को कमजोर करता है, क्योंकि परमाणु समझौते जैसे संवेदनशील विषयों में तकनीकी जटिलताएँ, सुरक्षा चिंताएँ और क्षेत्रीय संतुलन जैसे अनेक आयाम शामिल होते हैं।
उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से Donald Trump की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पूर्व में लिए गए कुछ एकतरफा निर्णयों ने कूटनीति की विश्वसनीयता को प्रभावित किया। उनका इशारा उस दौर की ओर था जब अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से हटने का निर्णय लिया था।
अरागक़ची का मत है कि ऐसे कदमों से न केवल संबंधित देशों के बीच अविश्वास बढ़ा, बल्कि उन नागरिकों की अपेक्षाएँ भी आहत हुईं जिन्होंने स्थिर और शांतिपूर्ण विदेश नीति की उम्मीद की थी।
बयान में यह भी कहा गया कि यदि तथ्यों के स्थान पर राजनीतिक बयानबाज़ी और अतिरंजना हावी हो जाए, तो संवाद की ज़मीन कमजोर पड़ जाती है। उनके अनुसार, कूटनीति धैर्य, पारदर्शिता और निरंतर वार्ता पर आधारित होती है, न कि दबाव और त्वरित लाभ की रणनीति पर।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएँ फिर से तेज़ हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की प्रगति के लिए सभी पक्षों को संतुलित, यथार्थवादी और परस्पर सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाना होगा।

