इज़रायल के तीन समाचार चैनलों ने नेतन्याहू का रिकॉर्डेड भाषण प्रसारित करने से इनकार किया
इज़रायल के तीन समाचार चैनलों ने बेंजामिन नेतन्याहू का रिकॉर्ड किया हुआ भाषण प्रसारित करने से इनकार कर दिया और उनसे कहा कि छिपने की जगह से वीडियो भेजने के बजाय सामने आकर कैमरे के सामने बात करें और सवालों के जवाब दें।
मीडिया सलाहकार रोनिन त्सूर की टिप्पणी भी इसी असंतोष को दर्शाती है। उनका कहना कि नेतन्याहू “मख़फ़ीगाह (छिपने की जगह)” से वीडियो भेज रहे हैं, दरअसल यह आरोप है कि प्रधानमंत्री खुलकर मीडिया और जनता के सवालों का सामना नहीं कर रहे। इस तरह की आलोचना इज़रायल जैसे देश में, जहाँ मीडिया अपेक्षाकृत स्वतंत्र है, राजनीतिक दबाव को और बढ़ा सकती है।
दूसरी तरफ, नेतन्याहू अपने वीडियो संदेशों में लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान और उसके सहयोगी समूहों (जैसे हिज़्बुल्लाह आदि) के खिलाफ इज़रायल की सैन्य कार्रवाइयों से “ऐतिहासिक उपलब्धियाँ” मिली हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि क्षेत्र में तनाव और संघर्ष आगे भी जारी रह सकता है।
नेतन्याहू के दावे के विपरीत उनके विरोधियों का कहना है कि अगर वाकई इतनी बड़ी सफलता मिली है, तो फिर प्रधानमंत्री खुलकर सामने आकर मीडिया के सवालों का जवाब देने से क्यों बच रहे हैं? यह विरोधाभास उनकी बातों की सच्चाई पर भी संदेह पैदा करता है।
विश्लेषकों के अनुसार, एक तरफ सरकार अपनी सैन्य सफलता का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देश के अंदर पारदर्शिता, सुरक्षा और रणनीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर यह मुद्दा कि प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आ रहे, राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।

