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जिस युद्ध का मकसद ईरान को तोड़ना था, वही उसे और मजबूत बना सकता: रॉयटर्स

जिस युद्ध का मकसद ईरान को तोड़ना था, वही उसे और मजबूत बना सकता: रॉयटर्स

यह युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहाँ साफ दिख रहा है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीति उलटी पड़ सकती है। जिस ईरान को कमजोर करने की कोशिश की गई, वही आज अपनी मजबूती, धैर्य और रणनीतिक क्षमता के कारण पहले से अधिक प्रभावशाली बनकर उभर रहा है।

अगर यह युद्ध बिना किसी ठोस समझौते के खत्म होता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा ईरान को मिल सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान न केवल इस सैन्य दबाव को झेल गया, बल्कि उसने यह भी साबित कर दिया कि उसे पूरी तरह झुकाना आसान नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की असली ताकत उसकी सहनशीलता (resilience) और लंबी लड़ाई लड़ने की क्षमता है। यह वही देश है जिसने 8 साल का इराक युद्ध और दशकों के प्रतिबंध झेले हैं, फिर भी उसकी राजनीतिक और सैन्य संरचना कायम रही।

ईरान और अमेरिका-इज़रायल युद्ध में ईरान ने एक बेहद अहम रणनीतिक हथियार का इस्तेमाल किया—ऊर्जा आपूर्ति पर नियंत्रण। होरमुज़ जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, पर प्रभाव डालकर ईरान ने वैश्विक ताकतों को सीधे चुनौती दी।

यही कारण है कि दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आया और बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ भी दबाव में आ गईं। इससे यह संदेश गया कि ईरान को नजरअंदाज करना या उस पर हमला करना वैश्विक स्तर पर महंगा साबित हो सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार, अगर युद्ध यहीं रुक जाता है तो ईरान के पास भविष्य में और भी ज्यादा रणनीतिक दबाव (leverage) होगा—खासतौर पर खाड़ी देशों और पश्चिमी ताकतों पर। वहीं खाड़ी देशों को एक अधूरे संघर्ष की आर्थिक और सुरक्षा कीमत चुकानी पड़ेगी।

एक और अहम बात यह है कि विरोधियों ने यह मान लिया था कि शीर्ष नेताओं को हटाने से ईरान की व्यवस्था बिखर जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान की सत्ता संरचना बहु-स्तरीय (multi-layered) है, जिसमें समानांतर संस्थाएँ और मजबूत नेटवर्क मौजूद हैं—जो उसे गिरने नहीं देते।

आज की स्थिति यह दिखाती है कि ईरान सिर्फ बचा ही नहीं है, बल्कि उसने यह भी साबित कर दिया है कि वह जवाबी कार्रवाई करने और दुश्मनों को नुकसान पहुँचाने की पूरी क्षमता रखता है।

कुल मिलाकर, यह युद्ध ईरान के लिए एक “कमजोरी” नहीं बल्कि एक रणनीतिक अवसर बनता दिख रहा है—जहाँ वह क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में अपनी पकड़ और मजबूत कर सकता है।

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