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अमेरिका का हमला आत्मरक्षा नहीं, बल्कि ईरानी जनता के खिलाफ़ आक्रमण था: बक़ाई

अमेरिका का हमला आत्मरक्षा नहीं, बल्कि ईरानी जनता के खिलाफ़ आक्रमण था: बक़ाई

ईरान का विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बक़ाई ने आज अमेरिका के विदेश मंत्रालय की उस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी जिसमें ईरान के खिलाफ़ युद्ध में शामिल होने को “आत्मरक्षा” बताया गया था।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा: “आत्मरक्षा—किस चीज़ के खिलाफ़??”

उन्होंने सवाल उठाया: “क्या ईरान की ओर से कोई ऐसा ‘सशस्त्र हमला’ किया गया था, जो ‘आत्मरक्षा’ को उचित ठहरा सके??”

इसके बाद उन्होंने स्वयं उत्तर देते हुए कहा: “निश्चित रूप से नहीं!” इसलिए, ईरान के खिलाफ़ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई आत्मरक्षा नहीं थी, बल्कि यह ईरानी जनता के खिलाफ़ एक आक्रामक और अवैध हमला था।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान की ओर से ऐसा कोई सशस्त्र हमला नहीं हुआ था, जो किसी भी तरह से अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को वैध ठहरा सके। उनके अनुसार, यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के खिलाफ़ था तथा इसे आत्मरक्षा कहना केवल वास्तविकता को छिपाने की कोशिश है। बक़ाई ने इसे सीधे तौर पर ईरानी जनता की संप्रभुता और सुरक्षा पर हमला करार दिया।

अराक़ची ने पेंटागन के दावे को झूठा बताया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची,ने आज युद्ध की लागत को लेकर पेंटागन के दावे को ग़लत बताते हुए कहा कि, बेंजामिन नेतन्याहू के इस जुए ने अब तक सीधे तौर पर अमेरिका पर 100 अरब डॉलर का बोझ डाल दिया है, जो घोषित राशि से चार गुना अधिक है।

उन्होंने कहा कि अप्रत्यक्ष खर्च अमेरिकी करदाताओं के लिए इससे कहीं ज़्यादा भारी साबित हो रहा है। स्थिति यह है कि हर अमेरिकी परिवार पर मासिक बोझ 500 डॉलर तक पहुँच गया है, और यह तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। अराक़ची ने अंत में कहा: “‘पहले इज़रायल’ की नीति का मतलब हमेशा ‘अंत में अमेरिका’ होता है।”

उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि “पहले इज़रायल” की नीति का परिणाम हमेशा “अंत में अमेरिका” के नुकसान के रूप में सामने आता है—यानी जिन नीतियों को अमेरिका अपने सहयोगी के हित में अपनाता है, अंततः उनका सबसे बड़ा राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक मूल्य खुद अमेरिका को चुकाना पड़ता है।

ईरानी नेतृत्व का मानना है कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ता तनाव केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं, बल्कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था और उसकी वैश्विक छवि के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इस बयानबाज़ी से साफ है कि ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है।

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