ऑपरेशन सादिक 4 की तीसरी और चौथी लहरें ऑपरेशन सादिक 3 से ज़्यादा एडवांस्ड हैं:आईअरजीसी
ईरान ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्रीय संप्रभुता, आत्मरक्षा और प्रतिरोध की नीति पर अडिग है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार ऑपरेशन “सादिक 4” की तीसरी और चौथी लहर पहले की तुलना में अधिक उन्नत तकनीक और बेहतर सटीकता पर आधारित है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया लगातार अस्थिरता और दोहरे मानदंडों का शिकार रहा है।
ईरान का कहना है कि वह उन शक्तियों के खिलाफ़ खड़ा है जो वर्षों से क्षेत्र में युद्ध, कब्ज़े और मानवाधिकार उल्लंघनों को बढ़ावा देती रही हैं। ईरान के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल द्वारा अपनाई गई आक्रामक नीतियों ने पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बनाया है। ग़ाज़ा से लेकर लेबनान तक, आम नागरिकों को भारी क़ीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ अक्सर मौन रहती हैं।
IRGC के बयान में जिन ठिकानों का ज़िक्र किया गया—जैसे हाइफ़ा पोर्ट और रमत डेविड एयर बेस—उन्हें इज़राइली सैन्य ढांचे का हिस्सा बताया गया है। ईरान समर्थकों का तर्क है कि जब एक पक्ष को बिना जवाबदेही के सैन्य शक्ति प्रयोग की खुली छूट हो, तो संतुलन और प्रतिरोध की बात करना स्वाभाविक है।
ईरान के समर्थक यह भी मानते हैं कि “सादिक प्रॉमिस” जैसे अभियानों को केवल सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि वर्षों के दबाव, प्रतिबंधों और धमकियों के जवाब के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि इज़राइल की विस्तारवादी नीतियाँ और फिलिस्तीनियों पर लगातार हमले क्षेत्रीय शांति के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
अंततः, इस पूरे घटनाक्रम से यही संदेश निकलता है कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति केवल सैन्य वर्चस्व से नहीं, बल्कि न्याय, समानता और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के निष्पक्ष पालन से ही संभव है। ईरान के समर्थक इसी संतुलन और जवाबदेही की माँग को अपनी आवाज़ बना रहे हैं।वांस्ड हैं:आईअरजीसी

