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शहीद सुप्रीम लीडर ने कहा था “अगर युद्ध हुआ तो इमाम हुसैन की तरह संघर्ष करेंगे: क़ालीबाफ़

शहीद सुप्रीम लीडर ने कहा था “अगर युद्ध हुआ तो इमाम हुसैन की तरह संघर्ष करेंगे: क़ालीबाफ़

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालीबाफ़ ने एक अहम बयान देते हुए कहा कि देश किसी भी संभावित युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है और उसकी रणनीति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।उन्होंने यह बात एक पुराने प्रसंग का ज़िक्र करते हुए कही, जिसमें उन्होंने शुरुआती 2000 के दशक में “शहीद नेता” के साथ हुई एक बैठक को याद किया।

क़ालीबाफ़ ने बताया कि उस बैठक में शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा था कि, यदि कभी दुश्मन के खिलाफ खड़े होने की नौबत आती है, तो वे समझौते का रास्ता नहीं अपनाएंगे, इमाम हुसैन की तरह डटकर संघर्ष करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहीद नेता ने अपने सिद्धांतों और विश्वासों पर अंत तक मजबूती से कायम रहकर इसका उदाहरण पेश किया।

उन्होंने आगे अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य ताकत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग यह सोचते हैं कि बमवर्षक विमानों के जरिए ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं को आसानी से नष्ट किया जा सकता है, लेकिन यह उनकी बड़ी गलतफहमी है।

क़ालीबाफ़ के अनुसार, ईरान ने अपनी रक्षा और हमले की रणनीति में व्यापक बदलाव किए हैं, जिन्हें समझना दुश्मन के लिए आसान नहीं है।

ड्रोन हमलों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि दुश्मन के पास चाहे कितनी भी आधुनिक तकनीक वाले ड्रोन क्यों न हों, ईरान उन्हें प्रभावी ढंग से नष्ट करने की क्षमता रखता है।

क़ालीबाफ़ ने यह भी खुलासा किया कि हाल ही में हुए 12 दिनों के युद्ध के बाद ईरान ने अपने लॉन्चर सिस्टम और सैन्य डिज़ाइन में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उन्होंने दावा किया कि अब दुश्मन के लिए इन सिस्टम्स को निशाना बनाना लगभग असंभव हो गया है।

ईरान और क्षेत्रीय इलाक़ों से ख़तरा खत्म होना चाहिए: क़ालीबाफ़

उन्होंने कहा कि, हमने अब “जंग–सीज़फ़ायर–मोलभाव–फिर जंग” की इस कड़ी को स्वीकार करना बंद कर दिया है; ख़तरे का असर पूरी तरह खत्म होना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप को समझ लेना चाहिए कि ताकत के गलत इस्तेमाल की छाया में शांति स्थापित नहीं की जा सकती। हम जंग नहीं चाहते, लेकिन पूरी मजबूती से अपना बचाव करेंगे और कड़ा जवाब देंगे।

12 दिन की जंग में हमने युद्ध-विराम तब स्वीकार किया जब उनकी ज़िद पर और इज़राक्षली शासन पर अपने आख़िरी हमलों के बाद यह फैसला लिया गया। लेकिन अब उन्होंने दिखा दिया है कि वे सुधरे नहीं हैं।

क़ालीबाफ़ ने कहा: मुझे नहीं पता एपस्टीन कांड में क्या हुआ और अमेरिकी लोगों के बारे में कौन-से दस्तावेज़ मौजूद हैं कि इस तरह उनकी लगाम नेतन्याहू के हाथ में है और वे ऐसे कदम उठा रहे हैं!

क़ालीबाफ़ ने कहा: 

मुझे नहीं पता एपस्टीन कांड में क्या हुआ और अमेरिकी लोगों के बारे में कौन-से दस्तावेज़ मौजूद हैं कि इस तरह उनकी लगाम नेतन्याहू के हाथ में है और वे ऐसे कदम उठा रहे हैं!

अपने पूरे बयान में क़ालीबाफ़ ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि ईरान किसी भी प्रकार के सैन्य दबाव या हमले के सामने झुकने वाला नहीं है और वह हर स्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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