इज़रायल पर एन.पी.टी. में शामिल होने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय दबाव डाले: ईरान
संयुक्त राष्ट्र के वियना कार्यालय तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में ईरान के राजदूत रज़ा नजफ़ी ने वियना में आयोजित परमाणु अप्रसार संधि (एन.पी.टी.) के सदस्य देशों के समीक्षा सम्मेलन के ग्यारहवें सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक परमाणु नीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि दुनिया में परमाणु निरस्त्रीकरण के बजाय एक नई परमाणु प्रतिस्पर्धा का माहौल बन रहा है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देश अपने परमाणु हथियारों के भंडार को आधुनिक बनाने और सैन्य क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह मांग भी दोहराई कि इज़रायल पर दबाव बनाया जाए ताकि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में लाए, परमाणु हथियारों का परित्याग करे और एन.पी.टी. में शामिल हो। ईरान का कहना है कि मध्य-पूर्व में स्थायी शांति और सुरक्षा तभी संभव है जब क्षेत्र के सभी देशों के लिए समान परमाणु नियम लागू हों और किसी एक देश को अपवाद न बनाया जाए।
अपने संबोधन में नजफ़ी ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के समृद्ध यूरेनियम को वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यधिक ख़तरा बताकर अंतरराष्ट्रीय जनमत को प्रभावित करने की कोशिश की, जबकि दूसरी ओर परमाणु निरस्त्रीकरण के अपने वादों को पूरा करने में लगातार विफल रहे।
उनके अनुसार, इस प्रकार की नीति का उद्देश्य दुनिया का ध्यान वास्तविक परमाणु शस्त्रीकरण की दौड़ से हटाकर ईरान पर केंद्रित करना है।
ईरानी प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि हालिया संघर्षों में नागरिक ढांचे—जैसे स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, पुलों, आवासीय इलाकों, मस्जिदों, गिरजाघरों, आराधनालयों और ऐतिहासिक स्थलों—को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसने युद्ध और शक्ति-राजनीति की मानवीय कीमत को उजागर कर दिया है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आग्रह किया कि वे केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित न रहें, बल्कि परमाणु निरस्त्रीकरण, जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

