पहला कदम अमेरिका को ईरान से बाहर निकालना था, दूसरा कदम उसे क्षेत्र से बाहर करना है: ईरानी सैन्य अधिकारी
ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी एडमिरल अहमदियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “एक्स” (ट्विटर) पर लिखा:
हम न तो धमकियों से पीछे हटते हैं और न ही शोर-शराबे और खोखले दिखावे से प्रभावित होते हैं; यह क्षेत्र हमारा खेल का मैदान है और हमारे जवाब तार्किक और वास्तविक गणनाओं पर आधारित होते हैं, न कि हॉलीवुड जैसी दिखावटी हरकतों पर। इस्लामी क्रांति ने पहले कदम में अमेरिका को ईरान से बाहर किया और दूसरा कदम उसे पूरे क्षेत्र से बाहर करना है।
एडमिरल अहमदियान का हालिया बयान एक बार फिर यह दर्शाता है कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय स्वतंत्रता के मुद्दे पर किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस्लामी क्रांति का पहला बड़ा कदम अमेरिका को ईरान से बाहर करना था, और अब अगला लक्ष्य पूरे क्षेत्र से अमेरिकी प्रभाव को समाप्त करना है। यह बयान केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही उस नीति का विस्तार है, जिसमें ईरान बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता रहा है।
अहमदियान ने यह भी जोर दिया कि ईरान न तो धमकियों से डरता है और न ही दिखावटी शक्ति प्रदर्शन से प्रभावित होता है। उनके अनुसार, क्षेत्रीय हालात को समझते हुए ईरान अपने फैसले पूरी तरह तार्किक और वास्तविक रणनीति के आधार पर लेता है। यह दृष्टिकोण इस बात को मजबूत करता है कि ईरान खुद को पश्चिमी ताकतों के मुकाबले एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है।
इतिहास भी इस बात का गवाह रहा है कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी दखल ने कई बार अस्थिरता को जन्म दिया है। ऐसे में ईरान का यह रुख क्षेत्रीय देशों के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है कि वे अपनी सुरक्षा और भविष्य के लिए बाहरी शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनें। कुछ विश्लेषणों में भी यह बात सामने आई है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को चुनौती देने के लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
इस पूरे परिप्रेक्ष्य में, अहमदियान का बयान केवल ईरान की नीति नहीं बल्कि एक व्यापक क्षेत्रीय सोच को भी दर्शाता है, जिसमें स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और बाहरी हस्तक्षेप से मुक्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।

