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ग़ाज़ा की सड़कों पर बहता हुआ ख़ून, इज़रायल की हैवानियत बयान कर रहा है

ग़ाज़ा की सड़कों पर बहता हुआ ख़ून, इज़रायल की हैवानियत बयान कर रहा है

ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि 11 अक्टूबर से लागू युद्धविराम के बाद से अब तक 786 लोग शहीद हो चुके हैं और 2,217 लोग घायल हुए हैं। वहीं, अभी भी अज्ञात संख्या में पीड़ित सड़कों और मलबे के नीचे पड़े हुए हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए हमलों के बाद से अब तक कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 72,562 हो गई है, जबकि 1,72,320 लोग घायल हुए हैं। इस बीच ग़ाज़ा पट्टी के भीतर मानवीय स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि कई शव अब भी मलबे के नीचे और सड़कों पर पड़े हुए हैं, क्योंकि मौजूदा हालात और जारी हमलों के चलते राहत और नागरिक सुरक्षा टीमें वहां तक पहुंच पाने में असमर्थ हैं।

इन सारी घटनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि, नेतन्याहू सरकार में इंसानियत नाम की कोई चीज़ नहीं बची है। हिज़्बुल्लाह और हमास को आतंकी संगठन बताने वाले पत्रकार और रक्षा विशेषज्ञ, इज़रायल द्वारा ग़ाज़ा और लेबनान में किए जा रहे आतंकवाद पर खामोश हैं।

ईरान पर तानाशाही का झूठा आरोप लगाने वाला वेस्टर्न मीडिया इज़रायल के अत्याचार और नेतन्याहू की तानाशाही पर खामोश तमाशाई बना हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार समूह इज़रायल की कठपुतली बनकर रह गए हैं। न तो उन्हें ग़ाज़ा के मज़लूमों पर ढाए जाने वाले ज़ुल्म दिखाई दे रहे हैं और न ही भूख से तड़पते हुए बच्चों की सिसकियाँ सुनाई दे रही हैं।

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