Site icon ISCPress

सीरिया में हज़रत ज़ैनब (स.) के हरम के इमामे जुमा की हत्या, अमेरिका और इज़रायल की साज़िश हैं: ईरान 

सीरिया में हज़रत ज़ैनब (स.) के हरम के इमामे जुमा की हत्या, अमेरिका और इज़रायल की साज़िश हैं: ईरान 

दमिश्क में हज़रत ज़ैनब का हरम के जुमे के ख़तीब शैख़ फ़रहान अल-मंसूर पर हुआ कायराना हमला न सिर्फ़ एक धार्मिक विद्वान की हत्या है, बल्कि यह इस्लामी एकता, अहले-बैत की मोहब्बत और मज़हबी पवित्र स्थलों की गरिमा पर सीधा हमला माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार उन पर ग्रेनेड से हमला किया गया, जिसकी व्यापक निंदा हो रही है।

हज़रत ज़ैनब (स.) का हरम करोड़ों अकीदतमंदों के लिए सब्र, कुर्बानी और हक़ की आवाज़ का प्रतीक है। ऐसे मुक़द्दस मक़ाम के इमामे-जुमा को निशाना बनाना उन ताक़तों की साज़िश हो सकती है जो क्षेत्र में नफ़रत और तफ़रक़ा फैलाना चाहती हैं। शैख़ फ़रहान अल-मंसूर जैसे उलेमा हमेशा अमन, दीन की जागरूकता और उम्मत की रहनुमाई का काम करते रहे; इसलिए उनकी शहादत को एक बड़े फ़ितने के रूप में देखा जा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बक़ाई ने आज दमिश्क में हुए आतंकवादी हमले और हज़रत ज़ैनब का हरम के जुमे के ख़तीब की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सीरिया की अंतरिम सरकार पर यह ज़िम्मेदारी है कि वह देश के लोगों, धार्मिक विद्वानों (उलेमा) और सभी जातीय, धार्मिक व मज़हबी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

इस्माईल बक़ाई ने इस जघन्य अपराध पर गहरी घृणा और नफ़रत व्यक्त करते हुए कहा कि सीरिया और पूरे क्षेत्र में धार्मिक स्थलों तथा धार्मिक विद्वानों के खिलाफ़ आतंकवादी कार्रवाइयाँ, इज़रायली शासन और संयुक्त राज्य अमेरिका की उस शैतानी साज़िश का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय देशों में फूट डालना, अशांति फैलाना और सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी पक्षों के लिए ज़रूरी है कि वे इन साज़िशों के प्रति सतर्क रहें और आतंकवाद तथा उग्रवाद के ख़िलाफ़ निर्णायक रूप से कार्रवाई करने की अपनी ज़िम्मेदारी निभाएँ।

Exit mobile version