“बच्चों की क़ातिल सेना ने नरसंहार में सभी लाल रेखाएँ पार कर दी हैं: आईआरजीसी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने “ऑपरेशन वादा-ए-सादिक 4” के 46वें आधिकारिक बयान में इज़रायल के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। बयान में कहा गया है कि इज़रायली सेना ने मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसे हालात का फायदा उठाते हुए लेबनान और फ़िलिस्तीन में आम नागरिकों—खासकर महिलाओं और बच्चों—को निशाना बनाया है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।
IRGC के अनुसार, यह सिर्फ सामान्य सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित “नरसंहार” है, जिसमें सभी नैतिक और मानवीय सीमाओं को पार कर दिया गया है। बयान में यह भी कहा गया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान के खिलाफ बनाए गए युद्ध के माहौल के कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान दूसरी ओर चला गया है, जिसका फायदा उठाकर इज़रायल ने अपने हमले और तेज कर दिए हैं।
ईरान ने इस स्थिति को “असहनीय” बताते हुए साफ चेतावनी दी है कि अगर लेबनान और फ़िलिस्तीन के नागरिकों के खिलाफ हमले जारी रहते हैं, तो इसका सीधा जवाब दिया जाएगा। IRGC ने विशेष रूप से कहा कि क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीन के उत्तरी क्षेत्रों और ग़ाज़ा के आसपास मौजूद इज़रायली सैन्य ठिकानों और सैनिक जमावड़ों को निशाना बनाया जा सकता है।
इस चेतावनी में यह भी स्पष्ट किया गया कि संभावित जवाबी कार्रवाई में भारी मिसाइल हमले और ड्रोन ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं, और इसमें किसी प्रकार की नरमी या हिचकिचाहट नहीं बरती जाएगी। यह बयान क्षेत्र में बढ़ते तनाव को और गंभीर संकेत देता है और यह दर्शाता है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

