जब तक देश की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती सशस्त्र बलों के हाथ ट्रिगर पर रहेंगे: मेजर जनरल रज़ाई
मजलिस-ए-तश्खीस-ए-मसलहत-ए-निज़ाम ( Expediency Discernment Council of the System) के सदस्य ने लिखा: तीन बार पीछे हटने के बाद, आखिरकार अमेरिका के डींगें हांकने वाले राष्ट्रपति को देश की गैरतमंद जनता, बहादुर सशस्त्र बलों और सर्वोच्च नेता के मजबूत व समझदारी भरे नेतृत्व के सामने झुकना पड़ा और उन्होंने इस्लामी गणराज्य ईरान की 10 सूत्रीय योजना को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार कर लिया।
इसके बावजूद, देश के हितों की पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सशस्त्र बल पूरी तरह सतर्क हैं और ट्रिगर पर उंगली रखे हुए हैं।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक गतिविधियाँ लगातार तेज़ बनी हुई हैं। मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई, जो ईरान की प्रभावशाली हस्तियों में गिने जाते हैं, ने अपने संदेश में यह संकेत देने की कोशिश की है कि हालिया घटनाक्रम में ईरान ने खुद को एक मज़बूत स्थिति में स्थापित किया है।
उनके अनुसार, अमेरिका ने शुरू में सख़्त रुख अपनाया था, लेकिन बार-बार पीछे हटने के बाद अंततः उसे ईरान के प्रस्तावित 10-सूत्रीय ढांचे को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करना पड़ा। रज़ाई ने इस स्थिति का श्रेय ईरान की “गैरतमंद जनता”, सशस्त्र बलों की “बहादुरी” और सर्वोच्च नेता के “दूरदर्शी नेतृत्व” को दिया। यह बयान घरेलू स्तर पर मनोबल बढ़ाने और यह संदेश देने के रूप में भी देखा जा रहा है कि देश बाहरी दबाव के आगे झुका नहीं है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। “हाथ ट्रिगर पर” होने का मतलब है कि ईरान की सैन्य ताकत अभी भी पूरी तरह सतर्क और तैयार स्थिति में है। यानी, अगर देश के हितों या सुरक्षा को किसी भी तरह का खतरा महसूस होता है, तो तुरंत जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बयान दोहरे संकेत देते हैं—एक तरफ कूटनीतिक बातचीत के लिए दरवाज़ा खुला है, तो दूसरी तरफ सैन्य तैयारी भी बरकरार है। इसका उद्देश्य विरोधी पक्ष पर दबाव बनाए रखना और साथ ही अपनी शर्तों पर बातचीत को आगे बढ़ाना हो सकता है।

