Site icon ISCPress

हमने शहीद सुप्रीम लीडर से सीखा है कि, अपमान और अधीनता को कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए: पेज़िश्कियान

हमने शहीद सुप्रीम लीडर से सीखा है कि, अपमान और अधीनता को कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए: पेज़िश्कियान

अमेरिका -ईरान के बीच शुक्रवार को होने वाले समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा: हमारी प्राथमिकता, समझौता हो या न हो, जनता की सेवा करना है।

अब तक जो समझ बनी है, वह युद्ध को रोकने और वार्ता शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

इस्लामी गणराज्य ईरान हर संभावित परिस्थिति के लिए तैयार है और सरकार का ध्यान, समझौते के साथ हो या बिना, ईमानदारी से जनता की सेवा करने पर केंद्रित है। ईरानी राष्ट्र ने अपने शहीद इमाम से यह सीखा है कि अपमान और अधीनता को कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए।

पेज़ेशकियान ने यह भी कहा कि वार्ता करने वाली टीम किसी भी स्थिति में इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता द्वारा निर्धारित नीतियों और लाल रेखाओं से पीछे नहीं हटेगी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी कदम राष्ट्रीय हितों और व्यवस्था द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार उठाए जाएंगे।

समझौते की अवधि में हम अपनी रक्षा क्षमता को और मजबूत करेंगे: ईरानी सेना के प्रवक्ता

हम हर उस समझौते और सहमति का समर्थन करते हैं जो ईरानी जनता के हितों को सुरक्षित करे, लेकिन हमारा मानना है कि दुश्मन को अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन कराने के लिए शक्ति का प्रदर्शन आवश्यक है।

यदि दुश्मन समझौते या सहमति-पत्र की किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है, तो हम तेज़ी और दृढ़ता के साथ क्षेत्र की सैन्य स्थिति को समझौते से पहले वाली अवस्था में वापस ले आएंगे।

सशस्त्र बलों की तैयारी पहले से भी अधिक उच्च स्तर पर बनाए रखी जाएगी, ताकि दुश्मन समझौते की शर्तों का पालन करने और अपने वादों को निभाने के लिए मजबूर रहे।

ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है, लेकिन बातचीत की दिशा में प्रगति हुई है। साथ ही ईरान यह संदेश भी दे रहा है कि वह वार्ता का समर्थन करता है, किंतु अपनी सैन्य शक्ति और रक्षा तैयारियों में कोई कमी नहीं आने देगा।

Exit mobile version