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तेहरान किसी भी अटैक का जवाब देने के लिए तैयार है, सभी विकल्प खुले हुए हैं: क़ालिबाफ़

तेहरान किसी भी अटैक का जवाब देने के लिए तैयार है, सभी विकल्प खुले हुए हैं: क़ालिबाफ़

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सीजफायर के बीच दोनों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। क़ालिबाफ़ ने डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया कि तेहरान किसी भी सैन्य आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर को ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ पर बताए जाने पर चेतावनी देते हुए कहा कि ‘तेहरान किसी भी अटैक का जवाब देने के लिए तैयार है, उसके पास सभी विकल्प खुले हुए हैं, हमारी सेना किसी भी हमले का कड़ा और निर्णायक जवाब देंगी।

ईरानी संसद के स्पीकर क़ालिबाफ़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘हमारी आर्म्ड फोर्स किसी भी आक्रमण का सबक सिखाने वाला जवाब देने के लिए तैयार हैं। ग़लत रणनीति और गलत फैसलों का नतीजा हमेशा ग़लत ही होता है, यह बात दुनिया पहले ही समझ चुकी है। हम हर विकल्प के लिए तैयार हैं, वे हैरान रह जाएंगे।

क़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं केवल रक्षात्मक स्थिति में नहीं हैं, बल्कि यदि दुश्मन कोई गलती करता है तो उसे ऐसा जवाब दिया जाएगा जिसे वह लंबे समय तक याद रखेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने पिछले वर्षों में दबाव, प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के बावजूद अपनी रक्षा क्षमता को लगातार मजबूत किया है और अब देश किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम है।

ईरानी नेतृत्व का मानना है कि अमेरिका लगातार दबाव और धमकी की नीति अपनाकर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहा है। तेहरान का कहना है कि उसने हमेशा अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और परमाणु अधिकारों की रक्षा की है और आगे भी किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। ईरानी राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि वॉशिंगटन की आक्रामक भाषा इस बात का संकेत है कि अमेरिका मध्य-पूर्व में अपनी घटती पकड़ को लेकर चिंतित है।

बता दें कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (11 मई) को ईरान के नए परमाणु प्रस्ताव को ‘कचरे का एक टुकड़ा’ बताते हुए खारिज कर दियाथा। उन्होंने व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि युद्ध-विराम ‘लाइफ सपोर्ट पर’ है।

ट्रंप ने कहा कि तेहरान की परमाणु वार्ता में दी गई नई प्रतिक्रिया ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ है। यह एक बेवकूफी भरा प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि ईरान पहले इस बात पर सहमत हुआ था कि हाल ही में अमेरिकी सैन्य हमलों से क्षतिग्रस्त संवर्धन (एनरिचमेंट) सुविधाओं से ‘परमाणु धूल’ हटाने की अनुमति देगा, लेकिन बाद में उसने अपना रुख बदल दिया।

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