चीन में ईरानी राजदूत का बयान,अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी विफल होगी
चीन की राजधानी बीजिंग में ईरान के राजदूत अब्दुल रेज़ा रहमानी फ़ज़ली ने क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से बात करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी एकतरफा नीतियों और दबाव की रणनीति के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शर्तें थोपना चाहता है। उनके अनुसार, यह तरीका न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है, बल्कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 40 दिनों के दौरान ईरानी जनता और सशस्त्र बलों ने जिस तरह का धैर्य और प्रतिरोध दिखाया, उसके चलते अमेरिका को अंततः युद्ध-विराम की दिशा में कदम बढ़ाना पड़ा। रहमानी फ़ज़ली के मुताबिक, यह घटनाक्रम यह साबित करता है कि दबाव और ताकत के जरिए किसी देश को झुकाया नहीं जा सकता।
राजदूत ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम केंद्र है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से में तेल की आपूर्ति होती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की समुद्री नाकेबंदी या सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय देशों के लिए, बल्कि पूरी विश्व अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
उनके अनुसार, अमेरिका की इस तरह की कोशिशें अंततः विफल होंगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसे कदमों का समर्थन नहीं करेगा।
रहमानी फ़ज़ली ने यह भी बताया कि ईरान फिलहाल एक ऐसे कूटनीतिक समाधान की दिशा में काम कर रहा है, जिससे सभी पक्षों को लाभ हो और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके। उन्होंने कहा कि ईरान की नीति टकराव के बजाय संवाद और सहयोग को प्राथमिकता देने की है।
इसके साथ ही उन्होंने चीन और रूस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के मुद्दे पर जो रुख अपनाया है, वह वैश्विक शांति के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, इन देशों द्वारा उठाए गए कदमों ने तनाव को और बढ़ने से रोकने में मदद की है।
अंत में उन्होंने कहा कि चीन लगातार यह कोशिश कर रहा है कि क्षेत्र में तनाव कम हो और कोई बड़ा संघर्ष न हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी संयम बरतेगा और बातचीत के माध्यम से इस संकट का समाधान निकाला जाएगा।

