यमनी सेना के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ का बयान: “हम फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के साथ हैं”
करते हुए फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन और क़स्साम ब्रिगेड के प्रति अपनी मज़बूत समर्थन भावना का इज़हार किया है। उन्होंने ज़ायोनी शासन के हमले में क़स्साम ब्रिगेड के एक वरिष्ठ कमांडर की शहादत पर गहरा दुःख और संवेदना प्रकट की।
यमन की सशस्त्र सेनाओं के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ मेजर जनरल यूसुफ़ हसन इस्माईल अल-मदानी ने कहा कि यमन की जनता और उसकी सेना फ़िलिस्तीन की प्रतिरोधी ताक़तों, विशेष रूप से क़स्साम ब्रिगेड, के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यमन इस संघर्ष को केवल फ़िलिस्तीन का मुद्दा नहीं मानता, बल्कि इसे पूरी उम्मत का मामला समझता है।
उन्होंने कहा कि शहीद कमांडर ने अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की राह, प्रतिरोध और फ़िलिस्तीनी जनता की रक्षा के लिए समर्पित कर दी। वर्षों तक संघर्ष और मुजाहिदाना जीवन बिताने के बाद अंततः उन्हें शहादत का उच्च दर्जा प्राप्त हुआ।
अल-मदानी ने ज़ोर देकर कहा कि शहीदों का ख़ून कभी व्यर्थ नहीं जाता। उनका मानना है कि इन पाक क़ुर्बानियों की बदौलत ज़ायोनी कब्ज़ेदारों का अंत निकट होगा और प्रतिरोध की यह राह लगातार मज़बूत होती जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि यमन, इंशाअल्लाह, मस्जिद-ए-अक़्सा की आज़ादी, फ़िलिस्तीनी ज़मीनों की मुक्ति और ग़ासिब ज़ायोनी शासन के ख़ात्मे तक प्रतिरोध के मोर्चे पर डटा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों का रास्ता ही इज़्ज़त, आज़ादी और विजय का रास्ता है, और यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक फ़िलिस्तीन पूरी तरह आज़ाद नहीं हो जाता।

