स्पेन ने इज़रायल पर संपूर्ण हथियार प्रतिबंध को मंज़ूरी दी
स्पेन की काउंसिल ऑफ़ मिनिस्टर्स ने इज़रायल पर संपूर्ण हथियार प्रतिबंध को मंज़ूरी दे दी है। इस फ़ैसले से इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार पर ग़ाज़ा में फ़िलिस्तीनियों की हत्या के मामले को लेकर दबाव और बढ़ गया है। अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कीरपो ने कहा, ‘‘यह फ़ैसला सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता और मानवाधिकारों के सम्मान के लिए स्पेन और प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व क्षमता का एक और सबूत है।’’
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ द्वारा पहले घोषित किया गया यह प्रतिबंध अब पहले से लागू आंशिक पाबंदियों से आगे बढ़कर क़ब्ज़े वाले इलाक़ों से हथियारों के निर्यात, ईंधन की आपूर्ति और वस्तुओं व सेवाओं के आयात पर भी रोक लगाता है।
लेफ्ट विंग समार ने अपने बयान में कहा, ‘‘स्पेन में पहले से आंशिक पाबंदियां थीं, जैसे स्लोवेनिया, बेल्जियम और नीदरलैंड्स ने लगाई थीं। लेकिन इस क़दम के साथ हम पहले देश हैं जिसने हथियारों के निर्यात, ईंधन की आपूर्ति और आयात पर पाबंदी लगाई है। हम यूरोपीय संघ के लिए राह आसान कर रहे हैं।’’
देरी से उठाया गया क़दम: आयोन बेलारा
हालांकि, पोडेमोस की नेता आयोन बेलारा ने समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि, यह क़दम बहुत देर से उठाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हथियार पाबंदियां, युद्ध अपराधों से पहले लगाई जाती हैं, न कि तब जब 60 हज़ार निर्दोष लोग शिकार बन चुके हों।’’
सरकारी प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री पिलार एल्ग्रिया ने फ़िलिस्तीन को मान्यता देने के स्पेन के रुख़ को दोहराया और संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री सांचेज़ के बयान को याद दिलाया। उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया, फ़िलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता देना तत्काल ज़रूरी है। स्पेन ने मई में ऐसा किया था और अब हम देख रहे हैं कि फ़्रांस, पुर्तगाल, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश उसका अनुसरण कर रहे हैं।’’
ग़ौरतलब है कि स्पेन ने शुरू से ही दो-राष्ट्र समाधान के ज़रिए सहअस्तित्व का समर्थन करने में अहम भूमिका निभाई है।

