यमन की नाकाबंदी करने वाले सऊदी की बाब-अल-मंदब की सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों से अपील
सऊदी अरब ने एक बार फिर बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। लेकिन यमन के खिलाफ वर्षों से सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए रखने वाले रियाद की इस अपील ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिस सऊदी अरब ने यमन पर नाकाबंदी और सैन्य दबाव की नीति अपनाई, उसे आज अचानक अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षा की चिंता क्यों सताने लगी है?
सऊदी अरब द्वारा हाल ही में गठित “बहुराष्ट्रीय समुद्री रक्षा गठबंधन” के कमांडर अब्दुल्लाह बिन सालिम अल-शहरी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि नौवहन की स्वतंत्रता के खिलाफ किसी भी खतरे का कड़ा जवाब दिया जाएगा। यह गठबंधन 30 जुलाई 2026 को गठित किया गया था और इसकी स्थापना बैठक में 43 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
लेकिन यमन का पक्ष इससे अलग है। सना स्थित यमनी अधिकारियों ने कहा है कि बाब-अल-मंदब में सामान्य समुद्री यातायात सुरक्षित है और सऊदी अरब द्वारा पैदा किए जा रहे खतरे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। यमनी अधिकारियों के अनुसार, केवल सऊदी जहाज़ों पर पहले से घोषित प्रतिबंध लागू है, जबकि अन्य जहाज़ों के लिए जलमार्ग खुला है।
यमनी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता याह्या सरीअ ने भी 11 सितंबर को कहा था कि बाब-अल-मंदब में सभी कंपनियों और जहाज़ों के लिए नौवहन सुरक्षित है, जबकि सऊदी जहाज़ों पर प्रतिबंध जारी है।
यमन का तर्क है कि सऊदी अरब को आज समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता की चिंता करने से पहले अपने उस अतीत का जवाब देना चाहिए, जब यमन पर सैन्य अभियान और नाकाबंदी के कारण आम यमनी आबादी को गंभीर मानवीय संकट का सामना करना पड़ा। ऐसे में रियाद की ओर से बाब-अल-मंदब की सुरक्षा को “वैश्विक जिम्मेदारी” बताना यमन के समर्थकों की नजर में दोहरे मानदंड का उदाहरण है।
हाल के दिनों में यमनी हूती बलों ने लाल सागर के पश्चिमी तट पर अपनी स्थिति मजबूत की है और बाब-अल-मंदब के आसपास रणनीतिक इलाकों तथा द्वीपों पर नियंत्रण बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने भी 15 सितंबर को कहा कि हूती बल बाब-अल-मंदब की ओर आगे बढ़े हैं, हालांकि उपलब्ध समुद्री निगरानी के अनुसार उस समय तक वाणिज्यिक जहाज़ों का आवागमन बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं हुआ था।
इस घटनाक्रम से सऊदी अरब की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि बाब-अल-मंदब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। लेकिन यमन का कहना है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने के बजाय सऊदी अरब को यमन के खिलाफ अपनी नीतियों और सैन्य हस्तक्षेप पर भी विचार करना चाहिए।
इस प्रकार, बाब-अल-मंदब को लेकर मौजूदा टकराव केवल समुद्री सुरक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सऊदी अरब और यमनी हूती बलों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का एक नया चरण बन गया है। रियाद जहां इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा का मुद्दा बता रहा है, वहीं सना इसे सऊदी दबाव और अपने खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखता है।

