सऊदी अरब, अमेरिकी परियोजनाओं का औज़ार है / हर आक्रमण का जवाब देंगे: यमन
यमन में कार्यवाहक सरकार के प्रधानमंत्री अल्लामा मोहम्मद मुफ़्ताह ने सऊदी अरब पर यमन के आंतरिक मामलों में लंबे समय से हस्तक्षेप करने और देश को अपने प्रभाव में रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। अल-मसीरा को दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि सऊदी अरब खुद को यमन के फैसलों का प्रमुख निर्णायक मानता रहा है और दशकों से यमन की राजनीति तथा उसके राष्ट्रीय संसाधनों पर प्रभाव डालने की कोशिश करता रहा है।
मुफ़्ताह के अनुसार, सऊदी हस्तक्षेप केवल हाल के वर्षों तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि, 1962 के बाद यमन में महत्वपूर्ण नियुक्तियों तक पर सऊदी मंज़ूरी का प्रभाव था। उन्होंने 1994 के यमनी गृहयुद्ध का उल्लेख करते हुए सऊदी अरब पर देश के विभाजन का समर्थन करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, 2014 की यमनी क्रांति के बाद सऊदी नेतृत्व में यमन के ख़िलाफ़ व्यापक सैन्य अभियान शुरू हुआ, जिसे उन्होंने देश की संप्रभुता के खिलाफ आक्रमण बताया।
मुफ़्ताह ने सऊदी अरब को अमेरिका की क्षेत्रीय नीतियों को लागू करने वाला पक्ष भी बताया। उनका दावा है कि यमन के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के पीछे अमेरिका की महत्वपूर्ण भूमिका थी और सऊदी अरब ने अमेरिकी हितों के अनुरूप काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि, यमन की रणनीतिक स्थिति, अरब सागर में उसकी लंबी तटरेखा और प्रस्तावित तेल पाइपलाइन जैसी परियोजनाओं के कारण सऊदी अरब पूर्वी यमन पर प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, इस्राईल और सऊदी अरब अभी भी यमन की राजनीतिक व्यवस्था और उसकी क्रांति को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यमनी नेतृत्व और जनता के बीच एकता के कारण ये प्रयास सफल नहीं होंगे।
मुफ़्ताह ने यमन की सैन्य रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने “नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी” का सिद्धांत अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि, यमन अपनी सुरक्षा और स्थिरता को ख़तरा पैदा करने वाले किसी भी पक्ष के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यमन को अमेरिका या इस्राईल से डर नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन के संबंध में मुफ़्ताह ने कहा कि यमन अंतरराष्ट्रीय जहाज़रानी को निशाना नहीं बनाता। उनके अनुसार, यमनी कार्रवाई मुख्य रूप से इस्राईल से जुड़े जहाजों के ख़िलाफ़ रही है और अमेरिका तथा ब्रिटेन के हस्तक्षेप के बाद उनके जहाज़ भी निशाने पर आए। अंत में उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी तट और बाब अल-मंदब क्षेत्र पर सुरक्षा नियंत्रण बहाल होने के बाद यमन की ओर से अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए कोई खतरा नहीं है और यमन क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए तैयार है।

