Site icon ISCPress

सऊदी अरब को लगातार ‘इनकार’ सुनना पड़ रहा; मिस्र भी यमन में सैनिक नहीं भेजेगा

सऊदी अरब को लगातार ‘इनकार’ सुनना पड़ रहा; मिस्र भी यमन में सैनिक नहीं भेजेगा

यमन संकट को लेकर मिस्र और सऊदी अरब के बीच रणनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। खबर के अनुसार, सऊदी अरब चाहता है कि क्षेत्रीय सहयोगी यमन में हूती आंदोलन यानी अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ अधिक सक्रिय भूमिका निभाएँ, लेकिन मिस्र यमन की धरती पर अपने ज़मीनी सैनिक भेजने के प्रस्ताव को लेकर बेहद सावधान है।

मिस्र की प्राथमिक चिंता लाल सागर और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात की सुरक्षा है। स्वेज नहर से होने वाली आय और लाल सागर के व्यापारिक मार्ग मिस्र की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए क़ाहिरा समुद्री मार्गों, व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक क़दम उठाने को तैयार है, लेकिन इसका अर्थ यमन के अंदर सैन्य अभियान में सीधे शामिल होना नहीं है।

मिस्र को आशंका है कि यमन में ज़मीनी सेना भेजना एक सीमित सैन्य अभियान के बजाय लंबे और खुले सैन्य संघर्ष में बदल सकता है। यमन की जटिल राजनीतिक और सैन्य परिस्थितियों में किसी अभियान की समय-सीमा तय करना कठिन होगा। इसके अलावा, हूतियों के खिलाफ सीधा युद्ध मिस्र को ईरान के साथ अप्रत्यक्ष टकराव में ला सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की संभावना होगी।

सऊदी अरब और मिस्र के बीच गहरे आर्थिक संबंध भी क़ाहिरा के रुख को प्रभावित करते हैं। व्यापार, निवेश, सऊदी अरब में काम करने वाले मिस्रियों की धनराशि और ऊर्जा संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि सऊदी क्षेत्र या तेल प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ते हैं और वैश्विक बाजार, परिवहन तथा बीमा लागत प्रभावित होती है, तो मिस्र को अपनी भागीदारी के स्तर पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।

फिलहाल मिस्र कूटनीति, समुद्री सुरक्षा, हवाई और ख़ुफ़िया साधनों को प्राथमिकता दे रहा है। उसका जोर है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के साथ स्पष्ट राजनीतिक योजना हो। काहिरा का तर्क है कि केवल हवाई या समुद्री हमलों से अंसारुल्लाह का ख़तरा स्थायी रूप से समाप्त नहीं किया जा सकता। राजनीतिक समाधान के बिना सैन्य अभियान दोबारा संघर्ष को जन्म दे सकता है।

इसलिए मिस्र किसी भी संभावित सैन्य भागीदारी की सीमा, उद्देश्य, अवधि, कानूनी आधार और अंतिम लक्ष्य को निर्णायक मान रहा है। फिलहाल उसका रुख सीधे जमीनी युद्ध में उतरने के बजाय समुद्री सुरक्षा और राजनीतिक समाधान पर केंद्रित है।

Exit mobile version