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सऊदी अरब और यूएई अमेरिकी ठिकानों को बंद करें: अंसारुल्लाह

सऊदी अरब और यूएई अमेरिकी ठिकानों को बंद करें: अंसारुल्लाह

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के एक वरिष्ठ नेता मोहम्मद अल-फ़रह ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से अपील की है कि वे अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करें। उनका कहना है कि इन विदेशी ठिकानों की मौजूदगी पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक रही है और इससे खाड़ी देशों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।

अल-फ़रह ने कहा कि सऊदी अरब और यूएई को “अमेरिकी–इज़रायली गठजोड़” से बाहर निकलकर क्षेत्रीय और इस्लामी एकता की ओर लौटना चाहिए। उनके अनुसार, यही एक रास्ता है जिससे ये देश खुद को बड़े संकट से बचा सकते हैं।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि, अमेरिका और इज़रायल की मौजूदगी इन देशों को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें सीधे संघर्ष का निशाना बना रही है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे मध्य-पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ रहा है। हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका–इज़रायल के बीच टकराव ने खाड़ी क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई

दूसरी ओर, सऊदी अरब, यूएई और अन्य अरब देशों ने अपने क्षेत्र में हुए ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है और उन्हें “संप्रभुता का उल्लंघन” तथा “खतरनाक उकसावा” बताया है। हाल ही में यूएई ने अपने यहां गैस और तेल ठिकानों पर हुए हमलों को “आतंकवादी कार्रवाई” बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।

हालांकि, इसी के साथ एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आता है। एक तरफ ये अरब देश अपने यहां अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों की आलोचना करते हैं, वहीं दूसरी तरफ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि ईरान पर किए गए अमेरिकी हमलों में क्षेत्र के कुछ देशों की जमीन या सुविधाओं का इस्तेमाल हुआ।

इसी मुद्दे को उठाते हुए अंसारुल्लाह के नेता ने कहा कि, अरब शासकों की यह नीति दोहरी है—वे सार्वजनिक रूप से युद्ध और हमलों की निंदा करते हैं, लेकिन व्यवहार में अमेरिका और इज़राइल को अपनी जमीन और संसाधनों का उपयोग करने की अनुमति देते हैं। उनके अनुसार, यही कारण है कि आज पूरा क्षेत्र युद्ध के खतरे में घिरता जा रहा है।

अल-फ़रह ने अंत में कहा कि अगर खाड़ी देश वास्तव में शांति चाहते हैं, तो उन्हें विदेशी सैन्य मौजूदगी खत्म करनी होगी और क्षेत्रीय समाधान की ओर बढ़ना होगा, वरना यह संघर्ष और भी व्यापक रूप ले सकता है।

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