इस्राईल का मुक़ाबला करने का एकमात्र रास्ता “प्रतिरोध’ है: हिज़्बुल्लाह महासचिव
हिज़्बुल्लाह महासचिव शेख़ नईम क़ासिम ने पाकिस्तान में ‘इमामिया स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन’ की स्थापना की 55वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित ‘शहीद-ए-मुक़ावमत’ सम्मेलन को भेजे गए एक संदेश में कहा कि प्रतिरोध, अपने सभी रूपों के साथ, अब भी क़ब्ज़े को समाप्त करने और ज़मीनों को मुक्त कराने का एकमात्र रास्ता है तथा अन्य सभी रास्ते केवल समय बर्बाद करने के समान हैं।
शेख़ नईम क़ासिम ने कहा कि अमेरिकी और इस्राईली ‘तानाशाही’ के सामने डटे रहना और प्रतिरोध करना तथा उनके उद्देश्यों को पूरा होने से रोकना स्वयं एक जीत है। उन्होंने कहा, “हमने लेबनान में प्रतिरोध के विकल्प को प्रत्यक्ष रूप से आज़माया और पाया कि, केवल यही विकल्प क़ब्ज़े वाले क्षेत्रों और इंसान को आज़ाद करता है।”
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने ज़ोर देकर कहा,
“दुश्मन के साथ कोई सैन्य समानता नहीं है, लेकिन हम जानते हैं कि हम सही पक्ष पर हैं और इस ज़मीन के मालिक हैं। इसलिए हमें हर कीमत पर प्रतिरोध करना चाहिए।” शेख़ क़ासिम ने कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी-इस्राईली आक्रमण का उद्देश्य इस्लामी व्यवस्था को गिराना था, लेकिन ईरान विजयी हुआ।”
उन्होंने कहा,
“भले ही लेबनान की स्थिति कई दिनों और महीनों तक जारी रहे, हम विजयी हैं, क्योंकि हमने डटकर मुकाबला किया और दुश्मन को अपने उद्देश्यों को हासिल करने से रोक दिया।” हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने कहा, “ शहीदों के सरदार, सैयद हसन नसरुल्लाह, लेबनान, फ़िलिस्तीन और पूरे क्षेत्र में प्रतिरोध का झंडा बुलंद करने में एक प्रमुख व्यक्तित्व थे और फ़िलिस्तीन का मुद्दा उनकी प्राथमिक दिशा थी।”
शेख़ क़ासिम ने कहा,
“फ़िलिस्तीन हमारे लिए केंद्रीय मुद्दा है, जैसा कि उम्मत के शहीदों के सरदार ने कहा और इसकी सिफारिश की थी। इसलिए हमें फ़िलिस्तीन के मुद्दे की मदद के लिए अपनी पूरी ताक़त से प्रयास करना चाहिए।”

