अपराधियों के सामने चुप रहना, भारी कीमत चुकाने जैसा है: पेज़ेश्कियान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अंतरराष्ट्रीय हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र को “पाषाण युग में वापस भेजने” जैसी धमकियाँ देना केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि खुले तौर पर एक बड़े युद्ध अपराध की ओर इशारा करता है। उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे पर उन्होंने अपने फ़िनलैंड के समकक्ष, जो एक क़ानून विशेषज्ञ भी हैं, से चर्चा की और पूछा कि क्या ऐसी भाषा और नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आतीं।
पेज़ेश्कियान ने ज़ोर देकर कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ती हिंसा और आक्रामक बयानबाज़ी मानवता के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उनका मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसे बयानों और कार्यों पर चुप्पी साध लेता है, तो इससे न केवल क़ानून व्यवस्था कमजोर होती है, बल्कि भविष्य में और बड़े संघर्षों का रास्ता भी खुल जाता है।
उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अतीत में भी जब-जब शक्तिशाली देशों या समूहों के अत्याचारों पर दुनिया ने खामोशी बरती, तब उसके परिणाम बेहद विनाशकारी रहे। इसलिए आज की चुप्पी कल की बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
अंत में उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील की कि मानवाधिकारों, न्याय और अंतरराष्ट्रीय क़ानून की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़ा होना ज़रूरी है, ताकि दुनिया को हिंसा और अन्याय के दुष्चक्र से बचाया जा सके।

