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लेबनान सरकार के फैसले पर उठे सवाल, हिज़्बुल्लाह और अमल का बहिष्कार

लेबनान सरकार के फैसले पर उठे सवाल, हिज़्बुल्लाह और अमल का बहिष्कार

ईरान के राजदूत के प्रत्यय-पत्र को अस्वीकार किए जाने के बाद लेबनान की सरकार के इस कदम पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कई राजनीतिक दलों का मानना है कि यह फैसला देश की संतुलित विदेश नीति के खिलाफ है और इससे आंतरिक राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।

एक लेबनानी सरकारी सूत्र ने अल-जज़ीरा से कहा कि ईरान के राजदूत के प्रत्यय-पत्र (क्रेडेंशियल्स) को अस्वीकार किए जाने के बाद, हिज़्बुल्लाह और अमल आंदोलन के मंत्री कैबिनेट की बैठकों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

हिज़्बुल्लाह और अमल आंदोलन से जुड़े मंत्रियों ने इस निर्णय को अनुचित बताते हुए कैबिनेट बैठकों का बहिष्कार शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम लेबनान को बाहरी दबावों के आगे झुकाने की कोशिश दिखाते हैं, जिससे देश की संप्रभुता और स्वतंत्र नीति प्रभावित हो सकती है।

विश्लेषकों के अनुसार, इस फैसले में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व को ऐसे संवेदनशील मामलों में संतुलन और संवा की नीति अपनानी चाहिए थी, ताकि देश के भीतर राजनीतिक सहमति बनी रहे।

इस घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि लेबनान की सरकार के अंदर गहरे मतभेद मौजूद हैं। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे न सिर्फ सरकार के कामकाज पर असर पड़ेगा बल्कि देश की पहले से कमजोर राजनीतिक और आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

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