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इज़रायल लेबनान की ज़मीन से बाहर निकले तभी शांति स्थापित होगी: रूस

इज़रायल लेबनान की ज़मीन से बाहर निकले तभी शांति स्थापित होगी: रूस

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में वासिली नेबेंज्या ने कहा कि इज़रायल संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों के मिशन का कोई सम्मान नहीं करता। ज़ायोनी बल यूनिफिल (लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल) के जवानों को निशाना बनाते हैं और उनकी हत्या करते हैं।

उन्होंने ज़ायोनी शासन से युद्ध-विराम का पालन करने और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का सम्मान करने की मांग की, साथ ही लेबनान की भूमि से कब्ज़ा करने वाली सेनाओं की वापसी का आह्वान किया। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि जब तक इज़रायली बल लेबनान की ज़मीन से बाहर नहीं निकलते, तब तक किसी भी शांति समझौते का स्थायी और मज़बूत रह पाना बेहद कठिन होगा।

उन्होंने कहा कि लेबनान की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय क़ानून का मूल सिद्धांत है। लगातार सैन्य तनाव, सीमा पर झड़पें और नागरिक इलाक़ों में अस्थिरता न केवल लेबनान बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को कमजोर करती है।

रूस ने चेतावनी दी कि जब तक विवादित क्षेत्रों से सैन्य उपस्थिति समाप्त नहीं होती और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक किसी भी शांति समझौते का स्थायी होना कठिन रहेगा। इस बयान को क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद आधारित समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।”

रूस ने यह भी कहा कि United Nations Security Council Resolution 1701 केवल एक औपचारिक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि लेबनान-इज़रायल सीमा पर शांति बनाए रखने की आधारशिला है। इस प्रस्ताव के पूर्ण पालन—जिसमें संघर्षविराम का सम्मान, सीमाई उल्लंघनों का अंत और विवादित क्षेत्रों से सैन्य वापसी जैसे बिंदु शामिल हैं—के बिना किसी स्थायी समाधान की कल्पना करना कठिन है।

इस बयान के माध्यम से रूस ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का रास्ता सैन्य दबाव नहीं, बल्कि संप्रभुता के सम्मान, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन और संतुलित कूटनीति से होकर गुजरता है।”

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