ट्रंप और नेतन्याहू के बल पर सत्ता का ख़्वाब देख रहे पहलवी ने इराकियों की मदद को “विदेशी हस्तक्षेप” बताया
रज़ा पहलवी, जो कल तक ताज-तख्त पाने के लिए अमेरिका और इज़राइल से ईरान पर हमले की गुहार लगा रहे थे, आज ईरान के संदर्भ में “विदेशियों” को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं!
उन्होंने दावा किया:कि,
“इस्लामी गणराज्य ने ईरान को विदेशियों (जिनमें इराक़ की जन-प्रतिरोध बल हश्द अल-शाबी भी शामिल है) के हवाले कर दिया है।” लेकिन सच्चाई कुछ और है:
हश्द अल-शाबी इराक की एक जन-आधारित ताक़त है, जिसने ISIS के खिलाफ डटकर मुकाबला किया और ईरान के शासन में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
इराक़ की मदद मानवीय और राहत से जुड़ी रही है—जिसमें दवाइयों, खाद्य सामग्री से लेकर चिकित्सा उपकरण तक शामिल हैं।
आयतुल्लाह सिस्तानी जो ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता हैं के निर्देशों के अनुसार, शिया समुदाय के पवित्र धर्म स्थल हज़रत अब्बास (अ.स.) के हरम की ओर से ईरान को 38 ट्रिलियन की सहायता भेजी गई। इससे पहले इमाम हुसैन (अ.स.) के हरम से भी जन-सहायता भेजी जा चुकी थी।
दिलचस्प बात यह है कि, खुद पहलवी कई सालों से “शासन परिवर्तन” के लिए ट्रंप और नेतन्याहू से सैन्य मदद की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब पड़ोसी देशों की मदद को “हस्तक्षेप” कह रहे हैं!
ट्रंप ने तीन बार खुले तौर पर उन्हें नजरअंदाज किया और सीधे “ईरान की जनता” से बात की—क्योंकि उनके विदेशी सहयोगी भी उन्हें विश्वसनीय नहीं मानते।

