ऑपरेशन सादिक़ 3′ 21वां चरण: आयरन डोम ईरानी मिसाइल को रोकने में नाकाम
ईरान और इज़रायल के बीच जारी टकराव में अब एक नया मोड़ आ गया है। ईरान ने “वादा-ए-सादिक़ 3” (Al-Waad al-Sadiq 3) नामक अपने जवाबी ऑपरेशन की 21वीं लहर के तहत रविवार की सुबह एक बेहद संगठित और शक्तिशाली हमला किया, जिसे अब तक की सबसे लंबी मिसाइल कार्रवाई माना जा रहा है। इस हमले का दायरा बेहद व्यापक था। उत्तरी हिस्से से लेकर दक्षिण तक, जिसमें इज़रायल के प्रमुख शहर हाइफ़ा और तेल अवीव भी शामिल हैं।
इस हमले में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन का संयुक्त प्रयोग किया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सेना ने ठोस और तरल ईंधन से चलने वाली मिसाइलों का उपयोग किया जो तकनीकी रूप से इज़रायली डिफेंस सिस्टम को पार करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई थीं। इसमें ऐसे ताक़तवर युद्ध कौशल और रणनीति का इस्तेमाल किया गया जिससे ज़ायोनी शासन का महँगा और जटिल डिफेंस नेटवर्क पूरी तरह विफल हो गया।
इज़रायली मीडिया ने भी माना है कि यह हमला अब तक का सबसे लंबा मिसाइल अटैक था, जिसकी वजह से पूरे देश में सायरन लगातार बजते रहे, और लोगों में दहशत का माहौल फैल गया। इस लहर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि:
1- ईरान द्वारा छोड़े गए सभी मिसाइल अपने निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक रूप से गिरे।
2- इज़रायली डिफेंस सिस्टम –जिसमें आयरन डोम और अन्य इंटरसेप्टर शामिल हैं,एक भी मिसाइल को रोक नहीं पाया।3- यह हमला सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिलिट्री लॉजिस्टिक्स, सप्लाई हब, और एयरबेस भी इस अभियान का निशाना बने। इस ऑपरेशन को एक साइकोलॉजिकल वारफेयर के रूप में भी देखा जा रहा है, क्योंकि लगातार सायरनों और हमलों ने इज़रायली नागरिकों के मन में असुरक्षा और भय का माहौल बना दिया है।
इस हमले से यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान अब सिर्फ बचाव की स्थिति में नहीं, बल्कि वह पूरी तैयारी और रणनीति के साथ आक्रामक जवाब देने में सक्षम है। यह हमला इज़रायल को यह चेतावनी भी है कि यदि उसने ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती दी, तो उसे उसका भारी और गहरा जवाब मिलेगा।
स्थिति अब बेहद नाज़ुक हो गई है, और पूरे क्षेत्र में युद्ध के और फैलने का खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर अब यह दबाव है कि वह इस संकट को गंभीरता से ले और तुरंत युद्ध-विराम की दिशा में ठोस प्रयास करे। ईरान से दागे गए सभी मिसाइल अपने निशाने पर लगे हैं और इज़रायली एयर डिफेंस एक भी मिसाइल को रोकने में नाकाम रहा है।

