ईरान के ख़िलाफ़ नेतन्याहू का “पहाड़”, चूहा निकला: इज़रायली मीडिया ने खोली हक़ीक़त
ईरान के ख़िलाफ़ लगातार आक्रामक बयानबाज़ी करने वाली इज़रायली सरकार अब अपने ही देश के मीडिया और रणनीतिक विशेषज्ञों के निशाने पर आ गई है। इज़रायली अख़बार Maariv ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में माना है कि ईरान के मुक़ाबले में इज़रायल एक गहरे रणनीतिक और राजनीतिक संकट में फँस चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के ख़िलाफ़ जिस बड़े सैन्य अभियान और “निर्णायक जीत” का सपना दिखाया था, उसका नतीजा उम्मीदों के बिल्कुल उलट निकला। अख़बार ने लिखा कि नेतन्याहू बार-बार युद्ध का माहौल बनाकर अपनी राजनीतिक नाकामियों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे इज़रायल की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिति और कमज़ोर हुई है।
मआरिव ने चेतावनी दी कि ईरान पर दोबारा हमला करने का दबाव इज़रायल को ऐसे संघर्ष में धकेल सकता है, जिसका अंजाम उसके लिए बेहद भारी साबित होगा। रिपोर्ट में कहा गया कि ग़ज़ा और लेबनान में लंबे संघर्ष के बावजूद इज़रायल अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका, जबकि दूसरी ओर “मुक़ावमत के मोर्चे” ने इज़रायल को लगातार सैन्य और मनोवैज्ञानिक दबाव में रखा।
अख़बार के मुताबिक़, लेबनान में युद्ध-विराम भी इज़रायल की मजबूरी का परिणाम था, क्योंकि लगातार बढ़ते सैन्य नुकसान, आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय आलोचना ने तेल अवीव को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नेतन्याहू जिस “पूर्ण विजय” का दावा कर रहे थे, वह ज़मीनी हक़ीक़त में दिखाई नहीं देती।
इज़रायली विश्लेषकों का मानना है कि ईरान को धमकाने की नीति अब उल्टा असर दिखा रही है। क्षेत्र में इज़रायल की छवि कमज़ोर हुई है और उसकी सेना की “अजेय” होने की धारणा को भी गंभीर झटका लगा है। यही वजह है कि अब इज़रायल के भीतर से ही यह आवाज़ उठने लगी है कि नेतन्याहू की युद्ध-नीति ने देश को सुरक्षा देने के बजाय और बड़े संकट में डाल दिया है।

