नेतन्याहू ने गादी आइज़ेनकोट के साथ बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने के विकल्प को ख़ारिज नहीं किया: येदिओत अहारोनोत
इस्राईली समाचार पत्र ‘येदिओत अहारोनोत’ ने ख़बर दी है कि इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नई सरकार के गठन को लेकर हुई गोपनीय बैठकों में गादी आइज़ेनकोट के साथ बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने के विकल्प को अभी भी खुला रखा है।
ईरानी समाचार एजेंसी इरना ने ‘येदिओत अहारोनोत’ के हवाले से बताया कि कैबिनेट के नेतृत्व में बारी-बारी से बदलाव किए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर नेतन्याहू ने कहा कि, वह सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालाँकि, नेतन्याहू के एक क़रीबी सहयोगी ने उनके इस बयान के विपरीत कहा कि, अभी तक राष्ट्रीय एकता सरकार के गठन के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू को इस बात की चिंता है कि आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले राजनीतिक खेमे, अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों (हारेदी) और अरब दलों के समर्थन से एक वैकल्पिक सरकार बन सकती है। ऐसी सरकार लंबे समय तक चल सकती है और इसके परिणामस्वरूप नेतन्याहू पूरी तरह सत्ता से बाहर हो सकते हैं।
इस्राईल की सत्तारूढ़ गठबंधन पार्टी के प्रमुख और लिकुड पार्टी के सांसद ओफिर काट्ज़ ने रविवार को कैबिनेट के नेतृत्व में किसी भी तरह के बदलाव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि, उनकी पार्टी प्रधानमंत्री पद के बारी-बारी से हस्तांतरण के किसी भी प्रस्ताव के ख़िलाफ़ है।
उन्होंने सरकार में शामिल होने के इच्छुक सभी राजनीतिक दलों से मौजूदा गठबंधन की संरचना के आधार पर सरकार में शामिल होने का आह्वान किया।
दूसरी ओर, समाचार वेबसाइट ‘कोल रीगा’ ने इस्राईल के सरकारी प्रसारण नेटवर्क ‘कान’ के हवाले से बताया कि, नेतन्याहू की टीम ने राष्ट्रीय एकता सरकार के गठन पर बातचीत शुरू करने के लिए एक शर्त रखी है। इसके तहत अमीर ओहाना को संसद (नेसेट) के अध्यक्ष पद पर बनाए रखना होगा।
इसके विपरीत, आइज़ेनकोट के क़रीबी सहयोगी ओहाना को पद से हटाने पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने से भी इनकार किया है। ये घटनाक्रम 27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद सामने आए हैं। चुनाव में नेतन्याहू के राजनीतिक खेमे को 53 सीटें, आइज़ेनकोट का समर्थन करने वाले दलों को 48 सीटें और दो अरब राजनीतिक सूचियों को 19 सीटें मिलीं।
हालाँकि, अगली सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद अब भी बने हुए हैं।
बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने की व्यवस्था क्या है?
इस व्यवस्था के तहत पहले डेढ़ या दो साल तक एक व्यक्ति प्रधानमंत्री रहता है। इसके बाद अगले कार्यकाल में दूसरा व्यक्ति प्रधानमंत्री का पद संभालता है। इससे पहले बेंजामिन नेतन्याहू और बेनी गैंट्ज़ के बीच भी इसी तरह की व्यवस्था पर सहमति बनी थी। लेकिन नेतन्याहू द्वारा समझौते का पालन नहीं किए जाने के कारण गैंट्ज़ की प्रधानमंत्री बनने की बारी कभी नहीं आई।

