नेतन्याहू ने अमेरिका में इस्राईल की प्रतिष्ठा को ‘निम्न स्तर’ तक पहुँचा दिया: हारेत्ज़
प्रसिद्ध इस्राईली दैनिक समाचार पत्र ‘हारेत्ज़’ ने शुक्रवार को प्रकाशित अपने संपादकीय में कहा है कि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका में इस्राईल की स्थिति और प्रतिष्ठा को ‘अभूतपूर्व निचले स्तर’ तक पहुँचा दिया है। संपादकीय में इस्राईल के सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी अमेरिका के साथ उसके संबंधों में गहराते गंभीर संकट को लेकर चेतावनी दी गई है।
हिब्रू और अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस संपादकीय में कहा गया है कि, “इस्राईल के आचरण और अन्य देशों, विशेष रूप से अमेरिका के साथ उसके संबंधों पर नज़र रखने वाला हर व्यक्ति वर्षों से अपने सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी के साथ इस्राईल के रणनीतिक संबंधों में अभूतपूर्व संकट की चेतावनी देता रहा है।”
अख़बार ने आगे लिखा कि नेतन्याहू और उनकी सरकार की वजह से हुए नुक़सान के परिणामस्वरूप दोनों देशों के संबंधों का एक नए निचले स्तर तक पहुँचना लंबे समय से अपेक्षित था। नेतन्याहू ने उन सभी नुकसानों से संबंधित “कई चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया”, जो वह इस रिश्ते को पहुँचा रहे थे।
हारेत्ज़ ने अमेरिका में इस्राईल की प्रतिष्ठा में तेज़ी से आई गिरावट के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में नेतन्याहू द्वारा की गई “अमेरिकी राजनीति में खुले तौर पर दखलअंदाज़ी” को जिम्मेदार ठहराया। दैनिक ने कहा कि डेमोक्रेट्स के बीच इस्राईल की प्रतिष्ठा “तबाह” हो चुकी है।
अख़बार ने स्पष्ट किया कि, यह नुक़सान अब केवल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं रह गया है। उसने लिखा है:
“पिछले दो वर्षों में नेतन्याहू, इतमार बेन-गवीर और बेज़ालेल स्मोट्रिच की सरकार ने रिपब्लिकन पार्टी (GOP) में भी इस्राईल की प्रतिष्ठा को एक नए निचले स्तर तक पहुँचा दिया है।”
हारेत्ज़ ने इस संबंध में ईरान के साथ युद्ध और उसके परिणामस्वरूप पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि, चरमपंथी इस्राईली बाशिंदों (सेटलर्स) द्वारा फ़िलिस्तीनियों के हिंसा, तथा ग़ाज़ा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में ईसाई समुदायों को हुए नुक़सान को ऐसे कारकों के रूप में गिनाया, जिनकी वजह से इस्राईल के सबसे वफ़ादार समर्थकों की ओर से भी “अभूतपूर्व आलोचना” सामने आई है।
संपादकीय में अमेरिका में किए गए हालिया सर्वेक्षण का भी हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, अमेरिकी नागरिकों के बीच इस्राईल के प्रति सकारात्मक भावनाओं में, विशेष रूप से युवा उत्तरदाताओं के बीच, “तेज़ और अभूतपूर्व गिरावट” देखी गई है।
इस्राईली अख़बार ने तर्क दिया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू का कोई भी भाषण “इस कड़वी सच्चाई को नहीं छिपा सकता।”
हारेत्ज़ ने इसके गंभीर दीर्घकालिक परिणामों की चेतावनी देते हुए ज़ोर दिया कि “हर इस्राईली को यह समझने की आवश्यकता है कि, अमेरिकी जनता की नज़र में इस्राईल की छवि किस हद तक बिगड़ चुकी है और इसका दोनों देशों के बीच संबंधों के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा।”

