नेतन्याहू ने हेग की अदालत को “भ्रष्ट संस्था” बताते हुए उसे बंद करने की मांग की
इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश जारी करते हुए दावा किया कि हेग की अदालत द्वारा इज़रायली शासन के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनका कोई कानूनी आधार नहीं है।
नेतन्याहू ने हेग स्थित International Criminal Court को “भ्रष्ट संस्था” बताते हुए उसे बंद करने की मांग की है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़रायल की सैन्य कार्रवाइयों और मानवीय हालात को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। किसी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था पर इस तरह का हमला न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करने और जवाबदेही से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
इज़रायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा:
“अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) एक भ्रष्ट और नैतिक रूप से दिवालिया संस्था है, जिसे बंद कर दिया जाना चाहिए। शुरू से ही स्पष्ट था कि इज़रायल सरकार और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के खिलाफ लगाए गए ये निराधार आरोप किसी भी ठोस आधार पर टिके हुए नहीं हैं।”
इस बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या शक्तिशाली देशों और उनके नेताओं को भी अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में समान रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है??
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी देश का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की वैधता पर सवाल उठाता है, तो इससे वैश्विक न्याय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान पर भी असर पड़ सकता है। कई मानवाधिकार संगठनों का मत है कि आरोपों को “निराधार” कहकर खारिज करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का सामना करना अधिक उचित रास्ता होता।

