अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित: अली लारीजानी
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं पर साफ़ साफ़ शब्दों में कहा है कि, ये बातचीत केवल परमाणु मुद्दे तक सीमित है और इसमें मिसाइल कार्यक्रम का कोई स्थान नहीं है। लारीजानी ने स्पष्ट किया कि परमाणु वार्ता में जिन विषयों पर चर्चा होनी थी, उन पर विचार-विमर्श और आदान-प्रदान जारी है।
कई क्षेत्रीय देश इन वार्ताओं का समर्थन कर रहे हैं
उन्होंने बताया कि क्षेत्र के कई देश इन वार्ताओं का समर्थन कर रहे हैं और वे चाहते हैं कि बातचीत सफल रहे। ईरान भी इस प्रक्रिया का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि ईरान वार्ता में सहयोग के लिए तैयार है और इन बातचीतों का उद्देश्य एक रचनात्मक और स्थायी समझौते तक पहुँचना है।
अल जज़ीरा समाचार नेटवर्क से बातचीत में लारीजानी ने कहा कि अतीत में ईरान ने 5+1 देशों के साथ एक समझौता किया था, जिसका ढांचा शांतिपूर्ण था और वह लागू भी हो रहा था, लेकिन अमेरिका में जिम्मेदार अधिकारियों के बदलने के बाद उसे छोड़ दिया गया। तब से कई समस्याएँ पैदा हुईं, हालांकि अमेरिका जो चाहता था, वह हासिल नहीं हुआ।
ईरान वार्ता का समर्थक, बशर्ते बातचीत न्यायसंगत और तर्कसंगत हो
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सात–आठ महीनों में इज़रायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध जैसा माहौल बनाया, लेकिन परिणाम उनके अनुकूल नहीं रहा। उन्होंने दोहराया कि ईरान पहले भी वार्ता का समर्थक था और अब भी है, बशर्ते बातचीत न्यायसंगत और तर्कसंगत हो।
मिसाइल कार्यक्रम का वार्ता से कोई संबंध नहीं
अल जज़ीरा के उस सवाल के जवाब में, जिसमें अमेरिका की कथित मांगों—शून्य प्रतिशत संवर्धन, मिसाइल कार्यक्रम समाप्त करने और ईरान के सहयोगी समूहों से जुड़े मुद्दों—का उल्लेख था, लारीजानी ने कहा कि ये बातें अतीत से जुड़ी हैं। मौजूदा बातचीत केवल परमाणु विषय पर है। यदि इसके अतिरिक्त कुछ और जोड़ा गया, तो वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
मिसाइल कार्यक्रम ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है
उन्होंने कहा कि मिसाइल कार्यक्रम ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है और उसका इस वार्ता से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए उपयुक्त आधार मौजूद है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि परमाणु कार्यक्रम हथियार की दिशा में न जाए, और इस बिंदु पर ईरान भी सहमत है।
लारीजानी ने कहा कि किसी भी राजनीतिक विषय में सौ प्रतिशत समाधान संभव नहीं होता, लेकिन करीब पहुँचा जा सकता है। यदि ईरान यह स्वीकार करे कि वह परमाणु हथियार की दिशा में नहीं जाएगा, तो इसे औपचारिक ढांचे में रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ईरान से अपनी चिंताओं को दूर करने की अपेक्षा करता है, तो उसे भी ईरान की चिंताओं को दूर करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ईरान की परमाणु सुविधाओं की निगरानी कर सकती है। ईरान इस निगरानी को स्वीकार करता है। निरीक्षण मासिक या दैनिक भी हो सकते हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि परमाणु बम छिपकर नहीं बनाया जा सकता।
तेहरान रिएक्टर के लिए 20 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका उपयोग कैंसर रोगियों के लिए दवाइयों के उत्पादन में होता है और यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। एजेंसी इसकी जाँच कर सकती है।
अमेरिका की दबाव नीति का जवाब दिया जाएगा
क़तर में स्थित अमेरिकी अल-उदीद एयरबेस पर ईरान के मिसाइल हमले के बारे में पूछे जाने पर लारीजानी ने कहा कि ईरान ने क़तर की भूमि पर हमला नहीं किया। उनके अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की थी और जवाब में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी ठिकाना है, कतर की भूमि नहीं। यदि अमेरिका भविष्य में ईरान पर हमला करता है, तो ईरान भी जवाब देगा।
उन्होंने कहा कि ईरान समस्या पैदा करना नहीं चाहता, बल्कि समाधान चाहता है। लेकिन यदि अमेरिका दबाव डालेगा, तो उसे उसी प्रकार का जवाब मिलेगा। उन्होंने कतर को ईरान का मित्र देश बताया।
लारीजानी ने अमेरिका को सलाह दी कि वह इज़रायल के कारण अपनी प्रतिष्ठा दांव पर न लगाए। उनके अनुसार, इज़रायल के क्षेत्र में विशेष उद्देश्य हैं और कई क्षेत्रीय नेता इज़रायल की नीतियों से सहमत नहीं हैं, भले ही वे अमेरिका के सहयोगी हों। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़रायल के बीच गठबंधन है।
यदि युद्ध थोपा गया, तो ईरान जवाब देने के लिए तैयार
अंत में लारीजानी ने कहा कि वे व्यापक युद्ध की संभावना को अधिक नहीं मानते, क्योंकि हालिया संघर्ष में अमेरिका और इज़रायल परिणाम देख चुके हैं और वह उनके हित में नहीं है। ईरान ने भी अपनी कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर किया है, लेकिन वह युद्ध नहीं चाहता और न ही उसकी शुरुआत करेगा। हालांकि, यदि युद्ध थोपा गया, तो ईरान जवाब देने के लिए तैयार है।

